77 साल में ऐसे बदली आम आदमी की जिंदगी, GDP में हुआ 133 गुना इजाफा
TV9 Bharatvarsh January 26, 2026 06:44 PM

देश में अपना संविधान लागू हुए 77 साल हो गए. भारत आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. यह सिर्फ एक संवैधानिक पड़ाव नहीं, बल्कि देश की सामाजिक और आर्थिक यात्रा का भी प्रतीक है. 1950 के दशक में भारत एक नया आजाद देश था, जहां संसाधन सीमित थे और आम आदमी की प्राथमिकता सिर्फ रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना थी. आज वही भारत वैश्विक मंच पर एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में खड़ा है.

आजादी के बाद शुरुआती वर्षों में भारत की अर्थव्यवस्था बेहद नाजुक थी. देश की GDP लगभग 30 अरब डॉलर के आसपास मानी जाती थी. खेती मुख्य आधार थी और उद्योग व सेवा क्षेत्र अभी शुरुआती दौर में थे. रोजगार के अवसर सीमित थे और तकनीकी विकास लगभग न के बराबर था. समय के साथ नीतियों, संस्थानों और मानव संसाधन के विकास ने तस्वीर बदलनी शुरू की.

77 साल में GDP ने लगाई लंबी छलांग

आज भारत की कुल GDP करीब 4 ट्रिलियन डॉलर के स्तर पर पहुंच चुकी है. यानी 1950 की तुलना में अर्थव्यवस्था का आकार सौ गुना से भी ज्यादा बढ़ गया है. सूचना प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्टअप इकोसिस्टम और सेवा क्षेत्र ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई है. भारत अब दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में गिना जाता है.

आम नागरिक की आय और जीवन स्तर में बदलाव

1950 के आसपास एक भारतीय की औसत सालाना आय सिर्फ 60-70 डॉलर के करीब थी. पक्के मकान, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं अधिकांश लोगों के लिए सपना थीं. आज स्थिति अलग है. प्रति व्यक्ति आय 2000 डॉलर से ऊपर पहुंच चुकी है. गांवों तक बैंकिंग, मोबाइल, इंटरनेट और सरकारी योजनाओं की पहुंच ने जीवन स्तर को बेहतर बनाया है. हालांकि, चुनौतियां अब भी मौजूद हैं, लेकिन अवसर पहले से कहीं ज्यादा हैं.

रुपया-डॉलर सिर्फ कमजोरी की कहानी नहीं

अक्सर रुपये की गिरती कीमत पर चर्चा होती है. 1950 में एक डॉलर करीब 4.7 रुपये का था, जबकि आज यह 90 रुपये के आसपास है. लेकिन इसे केवल कमजोरी के तौर पर देखना अधूरा विश्लेषण होगा. महंगाई, वैश्विक व्यापार, मुद्रा बाजार और खुली अर्थव्यवस्था जैसे कई कारकों ने इस बदलाव को प्रभावित किया है. शुरुआती दशकों में भारत को आयात के लिए विदेशी मदद पर निर्भर रहना पड़ता था. आज देश के पास करीब 700 अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार है. यह आर्थिक स्थिरता, निवेशकों के भरोसे और वैश्विक संकटों से निपटने की क्षमता को दर्शाता है.

दुनिया के साथ व्यापार में मजबूत पहचान

1950 के दशक में वैश्विक व्यापार में भारत की हिस्सेदारी सीमित थी. आज भारत का निर्यात और आयात दोनों कई गुना बढ़ चुके हैं. भारत अब अमेरिका, यूरोप, एशिया और अफ्रीका जैसे बड़े बाजारों के साथ सक्रिय व्यापार करता है. भूख और गरीबी से जूझने वाला भारत आज अंतरिक्ष मिशन, डिजिटल भुगतान, परमाणु शक्ति और स्टार्टअप इनोवेशन का केंद्र बन चुका है. UPI से लेकर चंद्रयान तक, भारत ने यह साबित किया है कि विकास और आत्मनिर्भरता साथ-साथ चल सकते हैं. 77 साल की यह यात्रा उपलब्धियों से भरी है, लेकिन चुनौतियां भी कम नहीं हैं. रोजगार, असमानता और सतत विकास जैसे मुद्दे अब भी ध्यान मांगते हैं. फिर भी, भारत की अब तक की कहानी यह दिखाती है कि सही दिशा और निरंतर प्रयास से बड़े बदलाव संभव हैं.

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