ईरान के साथ तनाव: हिंद महासागर पहुंचा USS अब्राहम लिंकन, अमेरिकी सैन्य ताकत बढ़ी
TV9 Bharatvarsh January 27, 2026 04:43 AM

ईरान के साथ तनाव के बीच अमेरिका का USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप हिंद महासागर में सेंटकॉम (CENTCOM) के समुद्री क्षेत्र में पहुंच चुका है. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के इलाके में पूरा मिडिल ईस्ट शामिल है. यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब मध्य पूर्व में हालात तेजी से बदल रहे हैं. इससे पहले ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई अंडरग्राउंड बंकर में चले गए हैं. इससे संकेत मिलता है कि कि ईरान किसी बड़ी सैन्य कार्रवाई की तैयारी कर सकता है.

अमेरिका के एक ड्रोन एक्सपर्ट ने बताया कि ईरान के ड्रोन झुंड (ड्रोन स्वार्म) US अब्राहम लिंकन और उसके साथ मौजूद स्ट्राइक ग्रुप के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि USS अब्राहम लिंकन अभी ईरान के खिलाफ किसी संभावित हमले के लिए पूरी तरह तैयार नहीं है. इसके बावजूद अमेरिका हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है.

ईरान के ड्रोन खतरनाक क्यों है?

ड्रोन बनाने वाली कंपनी ड्रैगनफ्लाई के CEO कैमरन चेल ने कहा कि ईरान ने कम लागत वाले ड्रोन और सस्ते विस्फोटकों का इस्तेमाल करके अत्याधुनिक सैन्य सिस्टम के खिलाफ एक असरदार रणनीति तैयार कर ली है. कैमरन चेल के मुताबिक, जब कम समय में सैकड़ों ड्रोन छोड़े जाते हैं, तो इसे सैचुरेशन अटैक कहा जाता है. यह USS लिंकन के लिए बड़ा खतरा हो सकता है, क्योंकि ये जहाज बड़े, धीमी गति वाले और रडार पर आसानी से दिखाई देने वाले लक्ष्य होते हैं.

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ईरान को लेकर अमेरिका अपनी सैन्य स्थिति मजबूत कर रहा है. इसके तहत हवा, जमीन और समुद्र, तीनों क्षेत्रों में सैन्य मौजूदगी बढ़ाई जा रही है. साथ ही सीरिया की स्थिति पर भी करीबी नजर रखी जा रही है. इसी कड़ी में एफ-15 लड़ाकू विमानों का एक स्क्वाड्रन क्षेत्र में भेजा गया है. इसके अलावा C-17 सैन्य विमान भारी सैन्य उपकरण लेकर वहां पहुंच चुके हैं.

कितना पावरफुल है USS लिंकन स्ट्राइक ग्रुप?

USS अब्राहम लिंकन एयरक्राफ्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप दुनिया के सबसे शक्तिशाली नौसैनिक युद्ध समूहों में गिना जाता है. यह न्यूक्लियर पावर से पर चलता है और 1 लाख टन से ज्यादा वजनी है. इस पर करीब 5 हजार सैनिक तैनात रहते हैं और 60 से 75 लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टर मौजूद होते हैं, जिनमें F/A-18 फाइटर जेट, रडार निगरानी विमान और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर एयरक्राफ्ट शामिल हैं. यह कैरियर अकेले ही एक छोटे देश की वायुसेना जितनी ताकत रखता है और महीनों तक बिना किसी जमीनी बेस के ऑपरेशन कर सकता है.

इस स्ट्राइक ग्रुप में एयरक्राफ्ट कैरियर के साथ मिसाइल से लैस डिस्ट्रॉयर, क्रूजर और एक अटैक सबमरीन भी शामिल होती हैं. इन जहाजों पर लंबी दूरी की टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें, एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम और पनडुब्बी रोधी हथियार तैनात रहते हैं. यह समूह दुश्मन पर हवाई हमले, समुद्री रास्तों की सुरक्षा, नो-फ्लाई जोन लागू करने और बड़े सैन्य अभियान चलाने में सक्षम है. किसी भी क्षेत्र में इसकी तैनाती अमेरिका की सैन्य ताकत और सख्त चेतावनी का संकेत मानी जाती है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.