आज साइन होगी EU के साथ 'मदर ऑफ ऑल डील्स', भारत को FTA से हैं ये उम्मीदें
TV9 Bharatvarsh January 27, 2026 10:42 AM

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच लंबे समय से चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) डील अब अपने आखिरी पड़ाव पर है. दोनों पक्षों के बीच समझौता लगभग फाइनल हो चुका है और अब बस इस पर साइन होना बाकी है, जो आज यानी 27 जनवरी को होने की संभावना है. इस डील के बाद भारत की रूस, अमेरिका और चीन जैसे बड़े ट्रेड पार्टनर्स पर निर्भरता कुछ हद तक कम हो सकती है. आइए जानते हैं कि भारत को इस समझौते से क्या-क्या फायदे हो सकते हैं.

भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच FTA पर बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, लेकिन मार्केट एक्सेस, लेबर लॉ, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और नियम-कानूनों को लेकर बातचीत बार-बार अटकती रही. ग्लोबल ट्रेड में रुकावटों और बढ़ते प्रोटेक्शनिज्म के माहौल के बीच साल 2022 में बातचीत फिर से शुरू हुई, और पिछले एक साल में इसमें तेजी देखने को मिली.

अधिकारियों के मुताबिक, इस बार सबसे बड़ा बदलाव पॉलिटिकल विल यानी राजनीतिक इच्छाशक्ति है. नई दिल्ली और ब्रुसेल्स, दोनों ही अब सप्लाई चेन को मजबूत करने और चीन पर निर्भरता घटाने के मकसद से इस आर्थिक साझेदारी को रणनीतिक रूप से बेहद अहम मान रहे हैं.

कारों पर टैरिफ

अधिकारियों और रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, इस प्रस्तावित समझौते का सबसे बड़ा मुद्दा यूरोपीय कारों पर लगने वाले इंपोर्ट ड्यूटी में कटौती है. फिलहाल भारत में पूरी तरह बनी कारों पर 70% से 110% तक टैक्स लगता है. प्लान के तहत 15,000 यूरो से ज्यादा कीमत वाली सीमित संख्या में यूरोपीय यूनियन में बनी कारों पर इंपोर्ट ड्यूटी तुरंत घटाकर 40% की जा सकती है, जो धीरे-धीरे कम होकर 10% तक आ सकती है. सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चरण में सालाना करीब 2 लाख पेट्रोल-डीजल कारें इस कटौती के दायरे में आ सकती हैं, हालांकि अंतिम संख्या पर अभी बातचीत जारी है.

घरेलू निवेश को सुरक्षित रखने के लिए इलेक्ट्रिक कारों को पहले पांच साल तक इस छूट से बाहर रखा जाएगा. Volkswagen, Mercedes-Benz और BMW जैसी यूरोपीय कंपनियों के लिए यह कदम भारत के अब तक सुरक्षित माने जाने वाले ऑटो मार्केट को काफी हद तक खोल सकता है.

इस समझौते से भारत क्या चाहता है?

भारत चाहता है कि उसके लेबर-बेस्ड इंडस्ट्रीज को यूरोपीय बाजार में बेहतर एंट्री मिले. इसमें टेक्सटाइल, रेडीमेड गारमेंट्स, लेदर, जेम्स एंड ज्वैलरी, इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स और प्रोसेस्ड फूड जैसे सेक्टर शामिल हैं. साल 2023 में यूरोपीय यूनियन द्वारा अपनी जनरल प्रेफरेंस स्कीम (GSP) के तहत दी जाने वाली छूट वापस लेने से इन सेक्टर्स को बड़ा झटका लगा था. FTA के तहत टैरिफ घटने या खत्म होने से भारतीय एक्सपोर्टर्स को एक बड़े और महंगे कंज्यूमर मार्केट में मजबूत मुकाबला करने का मौका मिल सकता है.

इसके अलावा भारत फार्मा और केमिकल सेक्टर के लिए आसान नियम, IT और प्रोफेशनल सर्विसेज में ज्यादा पहुंच, स्किल्ड वर्कर्स की आसान मूवमेंट और दो देशों में डबल सोशल सिक्योरिटी पेमेंट से राहत भी चाहता है. खेती और डेयरी जैसे संवेदनशील सेक्टर्स को फिलहाल समझौते से बाहर रखा गया है, ताकि घरेलू किसानों के हित सुरक्षित रह सकें.

यूरोपीय यूनियन को इससे क्या फायदा होगा?

यूरोपीय यूनियन के लिए यह डील दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक भारत में अपनी मजबूत पकड़ बनाने का मौका देगी. यूरोपीय वाइन और शराब, जिन पर अभी 150% से 200% तक इंपोर्ट ड्यूटी लगती है, उन पर धीरे-धीरे टैक्स घटने और सर्टिफिकेशन नियम आसान होने की उम्मीद है. इसके अलावा लग्जरी कारें, मशीनरी, केमिकल्स, मेडिकल डिवाइसेज और इलेक्ट्रॉनिक्स को भी कम टैरिफ का फायदा मिल सकता है.

वस्तुओं के साथ-साथ यूरोपीय यूनियन सर्विस सेक्टर, सरकारी खरीद, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स, लेबर और पर्यावरण मानकों पर साफ नियम चाहता है. साथ ही निवेश की मजबूत सुरक्षा भी उसकी बड़ी प्राथमिकता है. इस समझौते से भारत में मैन्युफैक्चरिंग, क्लीन एनर्जी और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में यूरोपीय निवेश बढ़ने की उम्मीद की जा रही है.

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