मुंबई, 27 जनवरी। प्रसिद्ध संगीतकार एआर रहमान अपने हालिया 'कम्युनल' बयान के कारण विवादों में हैं। इस मुद्दे पर राजनीति और मनोरंजन जगत के कई प्रमुख हस्तियों और साधु-संतों ने अपनी राय व्यक्त की है।
पूर्व अभिनेत्री और साध्वी ममता कुलकर्णी ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि हर चीज की एक उम्र होती है और युवा पीढ़ी में धैर्य की कमी है। ममता ने कहा, "आजकल संगीत युवाओं के अनुरूप हो गया है। पहले सब मिलकर काम करते थे, लेकिन अब म्यूजिक डायरेक्टर भी पॉपकॉर्न का आनंद ले रहे हैं। एआर रहमान को खुश होना चाहिए कि मैं यहां आकर अपना काम क्यों करूं और कौन सा गाना गाऊं।"
उन्होंने एक घटना का जिक्र किया जब वह दुबई में ध्यान कर रही थीं और किसी ने 'कमीने' फिल्म का उल्लेख किया। ममता ने कहा कि फिल्म का नाम ही ऐसा है, तो गाने कैसे होंगे? अब वह एक आध्यात्मिक जीवन जी रही हैं।
ममता कुलकर्णी 90 के दशक की प्रमुख अभिनेत्रियों में से एक रही हैं और उन्होंने कई सुपरस्टार्स के साथ काम किया है। उन्होंने आईएएनएस से बातचीत में बॉलीवुड में धर्म के आधार पर हो रहे भेदभाव पर अपनी चिंता व्यक्त की।
उन्होंने कहा, "मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मैंने 90 के दशक में काम किया। उस समय हम सब एक थे। आमिर खान मेरे घर आते थे। हम कभी धर्म को नहीं देखते थे। अब क्या बदल गया है? अब बॉलीवुड में भेदभाव है। लोग कहते हैं आमिर मुस्लिम हैं या हिंदू। यह सब खत्म होना चाहिए। एक कलाकार केवल कलाकार होता है, इसमें भेदभाव नहीं होना चाहिए।"
इससे पहले, शान, शंकर महादेवन और अनूप जलोटा भी इस मुद्दे पर अपनी राय रख चुके हैं। गायक शान ने कहा कि उन्हें भी कई वर्षों तक काम नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इसे व्यक्तिगत रूप से नहीं लिया।