FTA डिप्लोमेसी से ग्लोबल प्लेयर बना भारत, 35 लाख करोड़ डॉलर की GDP तक सीधी पहुंच
TV9 Bharatvarsh January 28, 2026 11:43 AM

जब दुनिया के कई बड़े देश आपसी व्यापार में दीवारें खड़ी करने में लगे हैं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप अपना अलग राग अलाप रहे हैं. ऐसे चुनौतीपूर्ण दौर में भारत ने अपना अगल रास्ता चुना है. भारत ने फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी एफटीए को अपनी ताकत बनाना शुरू कर दिया है. अभी हाल ही में देश ने यूरोपीय यूनियन के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन किया है. जिसको डील के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है. सिर्फ यूरोप ही नहीं, हाल के कुछ सालों में भारत ने कई सारे देशों के साथ एफटीए साइन किया है, जिससे करीब 35 लाख करोड़ डॉलर की जीडीपी तक देश की पहुंच सीधी हुई है. आइए इन्हीं एफटीए के बारे में आपको डिटेल में बताते हैं. इकोनॉमी का गणित भी समझाते हैं.

FTA का मतलब होता है दो या ज्यादा देशों के बीच ऐसा व्यापारिक समझौता, जिसमें एक-दूसरे के उत्पादों पर टैक्स या तो कम कर दिया जाता है या पूरी तरह खत्म कर दिया जाता है. इससे सामान सस्ता होता है, व्यापार बढ़ता है और कंपनियों को नए बाजार मिलते हैं. भारत अब इसी नीति के जरिए दुनिया के सबसे बड़े बाजारों तक सीधे पहुंच बना चुका है.

FTA से इकोनॉमी

पिछले कुछ सालों में भारत ने एफटीए के मोर्चे पर तेजी दिखाई है. आज भारत 15 से ज्यादा देशों और बड़े आर्थिक समूहों के साथ फ्री ट्रेड समझौते कर चुका है. ये साझेदार सिर्फ देश नहीं हैं, बल्कि दुनिया की बड़ी आबादी, विशाल भू-भाग और मजबूत अर्थव्यवस्थाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. इन्हीं समझौतों की बदौलत भारत को करीब 35 लाख करोड़ डॉलर की वैश्विक जीडीपी वाले बाजारों तक सीधी पहुंच मिल चुकी है.

इंडिया-ईयू FTA

इस रणनीति का सबसे बड़ा उदाहरण जनवरी 2026 में हुआ भारत-यूरोपीय यूनियन एफटीए है. यूरोपीय यूनियन 27 देशों का समूह है और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था माना जाता है. इस समझौते के बाद भारतीय कंपनियों को ऐसे बाजार तक सीधी एंट्री मिली है, जहां क्रयशक्ति भी मजबूत है और टेक्नोलॉजी व इंडस्ट्री का स्तर भी बहुत ऊंचा है. भारत और यूरोपीय यूनियन मिलकर अब दुनिया की कुल जीडीपी का करीब एक-चौथाई हिस्सा नियंत्रित करते हैं.

इंडिया आसियान एफटीए

एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक नेटवर्क ASEAN देशों के साथ है. दक्षिण-पूर्व एशिया के 10 देशों वाला यह समूह जनसंख्या और बाजार दोनों के लिहाज से बेहद अहम है. भारत-ASEAN एफटीए 2010 से लागू है, जिसके बाद भारत के ऑटो पार्ट्स, फार्मा, कृषि उत्पाद और इंजीनियरिंग सामान को बड़ा बाजार मिला. इस क्षेत्र में युवा आबादी और तेजी से बढ़ती खपत भारत के लिए लंबे समय का फायदा लेकर आ रही है.

छोटे दिखने वाले लेकिन बेहद अहम देशों के साथ भी भारत की मजबूत साझेदारी है. सिंगापुर और मॉरीशस जैसे देश भले आबादी के लिहाज से छोटे हों, लेकिन रणनीतिक तौर पर भारत के लिए बहुत बड़े हैं. सिंगापुर एशिया का फाइनेंशियल सेंटर है और मॉरीशस अफ्रीका तक पहुंच का रास्ता. इन देशों के साथ एफटीए भारतीय निवेश और सेवाओं के लिए नई राह खोलता है.

ऑस्ट्रेलिया से FTA

ऑस्ट्रेलिया के साथ हुआ एफटीए भारत के लिए संसाधन और एनर्जी सुरक्षा की दिशा में अहम कदम है. विशाल भू-भाग और खनिज संपदा से भरपूर ऑस्ट्रेलिया भारतीय निर्यात के लिए भी बड़ा अवसर देता है. इसी तरह जापान और दक्षिण कोरिया जैसे तकनीकी रूप से विकसित देशों के साथ समझौतों ने भारत के मैन्युफैक्चरिंग और टेक्नोलॉजी सेक्टर को मजबूती दी है.

भारत यूएई FTA

मध्य-पूर्व में यूएई के साथ एफटीए ने भारत को लॉजिस्टिक्स और ट्रेड हब तक सीधी पहुंच दी है. यूएई आज भारत का प्रमुख व्यापारिक पार्टनर बन चुका है और यह समझौता आने वाले वर्षों में व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला है.

भारत-यूके एफटीए

हाल ही में हुआ भारत-यूके एफटीए भारत की वैश्विक पहचान को और मजबूत करता है. कपड़ा, जेम्स-ज्वैलरी और फुटवियर जैसे सेक्टर को अब ब्रिटेन जैसे बड़े बाजार में बिना रुकावट एंट्री मिल रही है. कुल मिलाकर एफटीए डिप्लोमेसी ने भारत को उस दौर में मजबूती दी है, जब दुनिया में अनिश्चितता बढ़ी हुई है. भारत अब सिर्फ आयात-निर्यात करने वाला देश नहीं, बल्कि नियम तय करने वाली अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में बढ़ चुका है. यही वजह है कि भारत आज वैश्विक व्यापार की मेज पर एक अहम खिलाड़ी के रूप में खड़ा है.

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