पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस के 5 नहीं 2 ही मामले, NCDC की रिपोर्ट
TV9 Bharatvarsh January 28, 2026 03:43 PM

पश्चिम बंगाल में निपाह वायरस को लेकर हाल ही में कई मीडिया रिपोर्ट्स सामने आईं, जिनमें मामलों की संख्या पांच बताई गई. इससे लोगों के बीच डर और भ्रम की स्थिति बन गई. अब इस पर नेशनल सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल (NCDC) ने स्थिति साफ कर दी है. NCDC के अनुसार, दिसंबर से अब तक राज्य में निपाह वायरस के केवल दो ही मामलों की पुष्टि हुई है, पांच नहीं. संस्था ने साफ कहा है कि कुछ रिपोर्ट्स में तथ्यों को सही तरीके से नहीं दिखाया गया, जिससे गलत जानकारी फैल गई.

NCDC और स्वास्थ्य मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्थिति फिलहाल कंट्रोल में है और घबराने की जरूरत नहीं है. जिन मरीजों में संक्रमण पाया गया, उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान कर ली गई है और सभी की जांच की जा रही है. साथ ही केंद्र और राज्य सरकार मिलकर वायरस के प्रसार को रोकने के लिए एक तय योजना पर काम कर रही हैं. अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें.

गलत आंकड़ों पर NCDC का खंडन

निपाह वायरस को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया कि पश्चिम बंगाल में इसके पांच मामले सामने आए हैं. इस दावे को NCDC ने पूरी तरह खारिज कर दिया है. संस्था का कहना है कि जांच और रिकॉर्ड के आधार पर अब तक केवल दो ही मामले पुष्ट हुए हैं. बाकी आंकड़े अपुष्ट और भ्रामक हैं. NCDC ने बताया कि हर संदिग्ध मामले की लैब जांच के बाद ही उसे पुष्टि की श्रेणी में रखा जाता है.

बिना जांच के किसी भी मामले को निपाह संक्रमण मान लेना सही नहीं है. अधिकारियों का कहना है कि गलत आंकड़े फैलने से लोगों में डर बढ़ता है और स्वास्थ्य व्यवस्था पर अनावश्यक दबाव पड़ता है. इसी वजह से NCDC ने मीडिया और आम लोगों से अपील की है कि वे जिम्मेदारी के साथ जानकारी साझा करें. किसी भी बीमारी से जुड़ी खबर में आधिकारिक स्रोतों की पुष्टि बेहद जरूरी है, ताकि सही स्थिति लोगों तक पहुंच सके और बेवजह की घबराहट से बचा जा सके.

196 लोगों की जांच पूरी, सभी की रिपोर्ट नेगेटिव

निपाह वायरस के दोनों पुष्ट मामलों के बाद स्वास्थ्य विभाग ने तुरंत कॉन्टैक्ट ट्रैकिंग शुरू की. जिन लोगों का संक्रमित मरीजों से संपर्क हुआ था, उनकी पहचान कर ली गई है. सभी को निगरानी में रखा गया और उनकी जांच भी कराई गई. NCDC के अनुसार, अब तक जांच में शामिल सभी 196 लोगों की रिपोर्ट नेगेटिव आई है, जो राहत की बात है.

इसके अलावा स्वास्थ्य टीमें लगातार फील्ड में मौजूद हैं और किसी भी नए लक्षण पर तुरंत कार्रवाई की जा रही है. इस प्रक्रिया का मकसद वायरस को शुरुआती स्तर पर ही रोकना है, ताकि यह आगे न फैल सके और स्थिति कंट्रोल में बनी रहे.

सुरक्षा की तैयारी

निपाह वायरस को फैलने से रोकने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर एक स्पष्ट योजना बनाई है. इसमें निगरानी बढ़ाना, अस्पतालों को अलर्ट पर रखना और जांच की सुविधा मजबूत करना शामिल है. स्वास्थ्य कर्मियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं और आम लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

सरकार का कहना है कि फिलहाल स्थिति सामान्य है और सभी जरूरी कदम समय पर उठाए जा रहे हैं. सही जानकारी और सावधानी से इस वायरस पर काबू पाया जा सकता है.

निपाह वायरस क्या है, यह कितना खतरनाक?

लेडी हार्डिंग हॉस्पिटल में मेडिसिन विभाग में डायरेक्टर एचओडी डॉ. एल.एच. घोटेकर बताते हैं कि निपाह वायरस एक गंभीर और जानलेवा वायरस है, जो फल-बैट और संक्रमित व्यक्ति से फैल सकता है. यह तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस लेने में तकलीफ और दिमाग में सूजन जैसे लक्षण पैदा करता है.

अभी तक इसका कोई खास इलाज या वैक्सीन नहीं है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है. जल्दी पहचान और निगरानी से ही संक्रमण पर काबू पाया जा सकता है.

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