मशहूर संगीतकार एआर. रहमान अपने 'कम्युनल' वाले बयान को लेकर लगातार घिरे नजर आ रहे हैं. राजनीति से लेकर मनोरंजन जगत के कई बड़े सेलेब्स और साधु-संतों तक ने इस मुद्द पर अपनी राय दी है. अब पूर्व एक्ट्रेस और साध्वी ममता कुलकर्णी ने भी इस मुद्दे पर रिएक्ट करते हुए कहा कि हर चीज की एक सीमा और उम्र होती है.
युवा पीढ़ी में सब्र कम है और संगीत अब युवाओं जैसा बन रहा है. पुराना समय ऐसा था की हम सब साथ मिलकर काम करते थे और अब तो ऐसा है की म्यूजिक डायरेक्टर भी पॉपकॉर्न खाने लगे है. बेचारे एआर. रहमान को खुश होना चाहिए कि मैं यहां आकर अपना काम क्यों करूं और कौन सा गाना गाऊं.'
मै बहुत भाग्यशाली हूं कि मैनें 90 के दशक में काम किया है
इसके साथ उन्होंने ये भी कहा की "मै बहुत भाग्यशाली हूं कि मैनें 90 के दशक में काम किया है". उस समय हम सब एक थे. आमिर खान मेरे घर आकर बैठते थे. हम कभी धर्म या जात नहीं देखते थे. अब क्या बदल गया? अब बॉलीवुड में भेदभाव है. लोग कहते हैं आमिर मुस्लिम हैं या हिंदू. यह सब बंद होना चाहिए. एक कलाकार सिर्फ कलाकार होता है, इनमें भेदभाव मत लाओ.'
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अपने आवाज से लोगो के दिल में बनाया खास जगह
ए.आर. रहमान ने 30 वर्ष से ज्यादा समय तक बॉलीवुड में काम किया है अर अपनी आवाज से लोगो के दिल में खास जगह बनाया. उनहोंने 1992 में फिल्म 'रोजा' से अपने करियर की शुरुआत की थी. ए.आर. रहमान के सबसे प्रसिद्ध गानों में 'छैयां छैयां' (दिल से), 'जय हो' (स्लमडॉग मिलियनियर), और 'ताल से ताल मिला' (ताल) शामिल हैं. इसके अलावा, 'छोटी सी आशा' (रोजा), 'मैया मय्या' (गुरु), और 'कुन फाया कुन' (रॉकस्टार) भी बेहद लोकप्रिय हैं. उनकी सदाबहार धुनें भारतीय सिनेमा के आइकॉनिक गानों में गिनी जाती हैं.
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