बीटिंग रिट्रीट का महत्व और इतिहास, जानिए क्यों इस सेरेमनी के बिना अधूरा है गणतंत्र दिवस ?
Samachar Nama Hindi January 29, 2026 05:43 PM

हर साल 26 जनवरी को, पूरा देश और दुनिया भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत देखते हैं। सैनिकों की ज़ोरदार परेड पूरे कर्तव्य पथ (पहले राजपथ) को हिला देती है, जिससे देखने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। परेड खत्म होने के बाद, लोगों को लगता है कि गणतंत्र दिवस का जश्न पूरा हो गया है, लेकिन असल में, इस त्योहार का आधिकारिक समापन 29 जनवरी को होता है। इस दिन, दिल्ली के विजय चौक पर एक शानदार कार्यक्रम होता है, जिसे 'बीटिंग रिट्रीट' सेरेमनी के नाम से जाना जाता है। अगर आपने कभी टीवी पर ढलते सूरज की रोशनी में और रोशनी से जगमगाते राष्ट्रपति भवन के बैकग्राउंड में सेना के बैंड को धुनें बजाते देखा है, तो वही बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी है। तो, आइए आसान शब्दों में समझते हैं कि 'बीटिंग रिट्रीट' सेरेमनी क्या है और इसमें क्या होता है।

बीटिंग रिट्रीट क्या है?
बीटिंग रिट्रीट एक मिलिट्री परंपरा है। इसमें हमारी सेना, नौसेना और वायु सेना के बैंड हिस्सा लेते हैं। ये सैनिक अपनी खास वर्दी में, फॉर्मेशन में मार्च करते हैं और देशभक्ति की धुनें बजाते हैं जो सुनने वालों के दिलों में जोश भर देती हैं। इस कार्यक्रम का सबसे भावुक पल वह होता है जब सूर्यास्त के समय तिरंगे झंडे को पूरे सम्मान के साथ नीचे उतारा जाता है। इसके बाद, राष्ट्रपति की अनुमति से, सशस्त्र बल अपनी बैरक (कैंप) में लौट जाते हैं। यह इस बात का संकेत है कि गणतंत्र दिवस का जश्न आधिकारिक तौर पर खत्म हो गया है।

बीटिंग रिट्रीट कब शुरू हुआ?
बीटिंग रिट्रीट की कहानी सदियों पुरानी है। पुराने समय में, जब युद्ध होते थे, तो सूर्यास्त के बाद लड़ाई बंद हो जाती थी। उस समय, सैनिकों को वापस लौटने का संकेत देने के लिए ड्रम बजाए जाते थे। जैसे ही सैनिक यह आवाज़ सुनते थे, वे युद्ध का मैदान छोड़कर अपने कैंप में लौट आते थे। भारत ने इस परंपरा को अपने सशस्त्र बलों के हिस्से के रूप में अपनाया, और 1950 के दशक से, यह हमारे गणतंत्र दिवस समारोह को खत्म करने का मुख्य तरीका बन गया है। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी की खास बातें: मार्चिंग और संगीत
सेना के बैंड 'सारे जहां से अच्छा' और 'कदम कदम बढ़ाए जा' जैसी धुनें बजाते हैं, जो हर भारतीय के दिल को गर्व से भर देती हैं।

लाइट शो
जैसे ही अंधेरा होता है, राष्ट्रपति भवन और रायसीना हिल्स पर आस-पास की इमारतें हजारों रोशनी से जगमगा उठती हैं। यह नज़ारा देखने लायक होता है।

चीफ़ गेस्ट कौन हैं?
इस समारोह में चीफ़ गेस्ट भारत के राष्ट्रपति हैं, जो एक खास गाड़ी या काफिले में आते हैं। राष्ट्रपति के अलावा, प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और कई दूसरे सीनियर अधिकारी भी समारोह में मौजूद रहते हैं।

यह कार्यक्रम क्यों ज़रूरी है?
बीटिंग रिट्रीट सिर्फ़ एक म्यूज़िकल परफॉर्मेंस नहीं है; यह हमारी सेना के अनुशासन, एकता और ताकत का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि भले ही जश्न खत्म हो गए हों, लेकिन सीमाओं की रक्षा करने वाले हमारे सैनिक हमेशा सतर्क रहते हैं।

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.