प्रदेश की चर्चित साध्वी प्रेम बाईसा की बुधवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना ने प्रदेश में हलचल मचा दी है और उनके समर्थकों और समाज में चिंता की लहर दौड़ गई है।
साध्वी के इंस्टाग्राम अकाउंट से एक सुसाइड नोट भी पोस्ट किया गया, जिसे लेकर सवाल उठ रहे हैं कि उनकी मौत स्वाभाविक थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। सोशल मीडिया और स्थानीय जनता में इस घटना को लेकर संवेदनशीलता और आशंका देखी जा रही है।
साध्वी प्रेम बाईसा की मौत के बाद नागौर सांसद और राजस्थान लोक पार्टी (आरएलपी) सुप्रीमो हनुमान बेनीवाल ने मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि साध्वी की मौत की संदिग्ध परिस्थितियों और उनके सोशल मीडिया पोस्ट को ध्यान में रखते हुए पूरी तथ्यात्मक और निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है।
पिछले साल साध्वी का एक कथित वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वह एक भगवा कपड़े पहने शख्स के साथ आलिंगन करते हुए नजर आई थीं। इस वीडियो को लेकर भी कई सवाल उठाए गए थे और सोशल मीडिया पर विवाद शुरू हो गया था। इस घटना ने साध्वी की सार्वजनिक छवि और उनके समर्थकों में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं पैदा की थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि साध्वी जैसे सार्वजनिक व्यक्तित्वों की संदिग्ध मौत सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों पहलुओं से गंभीर प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा कि इस मामले में पुलिस और प्रशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए और जांच को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से अंजाम देना चाहिए।
स्थानीय पुलिस ने फिलहाल यह स्पष्ट किया है कि मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि सुसाइड नोट, सोशल मीडिया पोस्ट और पिछले विवादित घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सभी पहलुओं की जांच की जाएगी। साथ ही, संबंधित वीडियो और अन्य संदिग्ध दस्तावेज भी जांच में शामिल किए जाएंगे।
साध्वी प्रेम बाईसा के समर्थकों का कहना है कि उन्हें सामाजिक और धार्मिक रूप से सम्मानित व्यक्तित्व के रूप में जाना जाता था। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि साध्वी की मौत की पूर्ण और निष्पक्ष जांच कर उनके परिवार और समाज को संतोषजनक उत्तर प्रदान किया जाए।
राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषकों का कहना है कि इस प्रकार की घटनाएं केवल व्यक्तिगत दुख तक सीमित नहीं रहतीं। यह समाज और राजनीति पर भी प्रभाव डालती हैं और कई बार सामाजिक आंदोलनों और बहसों को जन्म देती हैं। हनुमान बेनीवाल की हाई लेवल जांच की मांग इस बात को दर्शाती है कि साध्वी की मौत को लेकर राजनीतिक और सामाजिक दबाव भी बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर, राजस्थान की साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत ने राज्य में सियासी, सामाजिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब यह देखना महत्वपूर्ण है कि प्रशासन और पुलिस मामले की जांच कितनी तेज़ी और पारदर्शिता के साथ पूरी करती है और साध्वी के समर्थकों को संतोषजनक जवाब मिलता है या नहीं।