सरकारी और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के लिए ईपीएफ वेतन सीमा में बदलाव की संभावना
newzfatafat January 30, 2026 03:43 AM
ईपीएफ वेतन सीमा में संभावित वृद्धि

केंद्र सरकार सरकारी और निजी क्षेत्र के लाखों कर्मचारियों के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव पर विचार कर रही है। जानकारी के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ) के लिए अनिवार्य वेतन सीमा को वर्तमान 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये करने की योजना बनाई जा रही है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है, तो बड़ी संख्या में कर्मचारी जो अब तक इस सामाजिक सुरक्षा योजना से बाहर थे, इसमें शामिल हो सकेंगे।


प्रस्ताव की मंजूरी की प्रक्रिया

यदि इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है, तो इसे अगले महीने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के केंद्रीय न्यासी बोर्ड की बैठक में प्रस्तुत किया जा सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, सरकार इसे 1 अप्रैल से लागू करने की दिशा में भी कदम उठा रही है, ताकि नए वित्तीय वर्ष से यह व्यवस्था प्रभावी हो सके।


वर्तमान नियम और बदलाव की आवश्यकता

वर्तमान में, जिन कर्मचारियों का मासिक वेतन 15,000 रुपये तक है, उनके लिए ईपीएफ योगदान अनिवार्य है। यह सीमा 2014 के बाद से नहीं बदली गई है, जबकि इस दौरान वेतन और महंगाई में काफी वृद्धि हुई है। इसके कारण, कई कम और मध्यम कौशल वाले कर्मचारी अनिवार्य सामाजिक सुरक्षा से बाहर रह गए हैं।


वेतन सीमा बढ़ने के प्रभाव

यदि वेतन सीमा 25,000 रुपये तक बढ़ाई जाती है, तो 15,000 से 25,000 रुपये कमाने वाले कर्मचारियों की सैलरी से हर महीने पीएफ की कटौती अनिवार्य हो जाएगी। इससे उनकी हाथ में आने वाली राशि थोड़ी कम हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक में रिटायरमेंट के लिए बचत में सुधार होगा और आर्थिक सुरक्षा बढ़ेगी।


नियोक्ताओं पर प्रभाव

इस बदलाव का नियोक्ताओं पर भी असर पड़ेगा, क्योंकि नियमों के अनुसार, नियोक्ता को भी कर्मचारी के बराबर पीएफ योगदान करना होता है। इससे वेतन खर्च में वृद्धि होगी, जो विशेष रूप से श्रम-प्रधान उद्योगों पर प्रभाव डाल सकती है। हालांकि, सरकार का मानना है कि सामाजिक सुरक्षा का विस्तार दीर्घकालिक में कार्यबल के लिए लाभकारी रहेगा।


ईपीएफ सुविधाओं का विस्तार

सूत्रों के अनुसार, ईपीएफ से जुड़ी सभी सुविधाएं जैसे भविष्य निधि जमा, पेंशन योजना और बीमा कवर भी नई वेतन सीमा के अनुसार निर्धारित की जाएंगी। इसका मतलब है कि जिनका वेतन बढ़ी हुई सीमा में आएगा, उन्हें इन सभी लाभों का विस्तृत दायरा मिलेगा।


सुप्रीम कोर्ट का निर्देश

इस प्रस्ताव पर तेजी इसलिए भी आई है क्योंकि हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएफओ को चार महीने के भीतर वेतन सीमा की समीक्षा करने का आदेश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि बढ़ती मजदूरी और महंगाई के कारण बड़ी जनसंख्या सामाजिक सुरक्षा से वंचित रह गई है, जिसे दूर करना आवश्यक है।


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