GST डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र विवाद से जुड़ा गंभीर मामला बन गया है. अब आरोप लगाया जा रहा है कि प्रशांत और उनकी बहन ने एक ही डॉक्टर से प्रमाण पत्र बनवाया है.
GST Deputy Commissioner Prashant Singh Resignation, Sister Fake Disability Certificate Controversy: उत्तर प्रदेश जीएसटी विभाग के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह का इस्तीफा अब केवल एक प्रशासनिक या नैतिक कदम भर नहीं रह गया है, बल्कि यह फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र, लंबित जांच और रिकवरी से बचने के आरोपों से जुड़ा एक गंभीर मामला बनता जा रहा है. प्रशांत सिंह पर आरोप है कि उन्होंने दिव्यांग कोटे के तहत फर्जी प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी हासिल की.
आरोप लगाने वाले पक्ष का दावा है कि जब इस मामले की जांच को प्रभावित या मैनेज करना संभव नहीं हुआ, तब इस्तीफे का रास्ता चुना गया, ताकि न तो जांच आगे बढ़े और न ही किसी तरह की वित्तीय रिकवरी हो सके.
पूरा परिवार सरकारी सेवा से जुड़ाप्रशांत कुमार सिंह का परिवार लंबे समय से सरकारी सेवाओं से जुड़ा रहा है. पत्नी वीणा सिंह मुंबई एयरपोर्ट पर स्पोर्ट्स कोटे से सिक्योरिटी इंचार्ज (दारोगा) के पद पर तैनात थीं. वह करीब पांच साल पहले इस्तीफा दे चुकी हैं. उनकी दो बेटियां हैं, जिनकी उम्र लगभग 10 और 15 वर्ष है. दोनों पत्नी के साथ लखनऊ में रहती हैं.
बहन जया सिंह कुशीनगर में हैं तहसीलदारपिता त्रिपुरारी सिंह आजमगढ़ बिजली विभाग से बाबू पद से सेवानिवृत्त है. बड़े भाई विश्वजीत सिंह लखनऊ में ही रहते हैं, छोटी बहन जया सिंह कुशीनगर के हाटा में तहसीलदार (PCS अधिकारी) के पद पर तैनात हैं.
एक ही डॉक्टर से फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाने का आरोपइस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर आरोप यह है कि प्रशांत कुमार सिंह और उनकी बहन जया सिंह, दोनों ने एक ही डॉक्टर से अलग-अलग वर्षों (2009 और 2012) में दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया. आरोपकर्ता का दावा है कि दोनों प्रमाण पत्र फर्जी हैं और इस संबंध में दस्तावेजी सबूत भी मौजूद हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे मामले की जांच दोनों अधिकारियों के खिलाफ चल रही है.
भाई विश्वजीत सिंह का बड़ा दावाप्रशांत सिंह के बड़े भाई विश्वजीत सिंह ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रशांत सिंह की जन्मतिथि 28 अक्टूबर 1978 है. ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। 27 अक्टूबर 2009 को, 31 वर्ष की उम्र में उन्होंने CMO मऊ से 40% दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया. इसी आधार पर 2011 बैच में UPPSC के जरिए 4% दिव्यांग आरक्षण कोटे से चयन हुआ.
विश्वजीत सिंह का दावा है कि विवाद सामने आने के बाद से प्रशांत और जया सिंह से उनकी कोई बातचीत नहीं हुई, लेकिन उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं. उन्होंने साफ कहा, “जिसे जो करना है कर ले, लेकिन मैं किसी विकलांग का हक नहीं जाने दूंगा। यह मेरी नैतिक जिम्मेदारी है.”
शिकायत, जांच और इस्तीफे का पूरा गणितआरोपकर्ता के मुताबिक, 13 अक्टूबर 2025 को राज्य आयुक्त दिव्यांगजन के यहां शिकायत दर्ज की गई. जांच के आदेश CMO मऊ को दिए गए. 19 दिसंबर 2025 को CMO ने स्वास्थ्य महानिदेशक को कोर्ट के आदेश के संदर्भ में पत्र लिखा. शुरुआत से ही जांच को प्रभावित करने की कोशिशें होती रहीं. जब जांच नहीं रुकी, तो इस्तीफा देने का विकल्प चुना गया. दावा किया जा रहा है कि प्रशांत सिंह चाहते हैं कि इस्तीफा स्वीकार होते ही न जांच आगे बढ़े और न ही किसी तरह की रिकवरी हो.
राजनीति और पुराना करियरफिलहाल यह पूरा मामला आरोपों, दस्तावेजों और जांच के बीच फंसा हुआ है। प्रशासनिक हलकों में सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इस्तीफा स्वीकार हो भी जाता है, तो क्या लंबित जांच जारी रहेगी या मामला ठंडे बस्ते में चला जाएगा? अब सबकी नजरें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं कि इस मामले की सच्चाई कब और कैसे सामने आती है.