राजकोट: खेलते हुए एक मासूम की मुस्कान और उसके साथ हुई दरिंदगी ने पूरे समाज को हिलाकर रख दिया है। गुजरात के राजकोट जिले में एक सात साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म की घटना ने देशभर में आक्रोश पैदा किया। इस मामले में स्पेशल कोर्ट ने आरोपी रेमसिंह तेरसिंह डुडवा को फांसी की सजा सुनाई है, जो कि घटना के केवल 35 दिनों के भीतर आया है, जिससे पीड़ित परिवार को न्याय मिला है।
घटना 4 दिसंबर 2025 को हुई, जब बच्ची खेत में खेल रही थी। आरोपी ने उसे बहला-फुसलाकर झाड़ियों की ओर ले जाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। बच्ची को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों ने जटिल ऑपरेशन के बाद उसकी जान बचाई। यह घटना पूरे गुजरात में हड़कंप मचा गई।
पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए त्वरित कार्रवाई की। आरोपी को 8 दिसंबर को गिरफ्तार किया गया और केवल 11 दिनों में चार्जशीट दाखिल की गई। जांच के दौरान आरोपी की निशानदेही पर महत्वपूर्ण सबूत मिले और डीएनए रिपोर्ट ने भी उसकी संलिप्तता की पुष्टि की। राजकोट ग्रामीण के एसपी विजयसिंह गुर्जर ने बताया कि मेडिकल, तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के साथ-साथ बच्ची की पहचान परेड इस केस की सबसे मजबूत कड़ी बनी।
पहचान परेड के दौरान अधिकारियों ने एक संवेदनशील तरीका अपनाया। कई लोगों को अलग-अलग खिलौने दिए गए, लेकिन बच्ची ने हर बार बिना किसी भ्रम के आरोपी को पहचान लिया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह पल जांच के लिए निर्णायक साबित हुआ।
सरकारी वकील एस. के. वोरा ने कोर्ट में दलील दी कि यह अपराध दुर्लभ से दुर्लभतम श्रेणी में आता है। उन्होंने बताया कि आरोपी को अपने कृत्य पर कोई पछतावा नहीं था और वह अदालत में भी खुद को निर्दोष बताता रहा। कोर्ट ने सभी सबूतों, गवाहों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए उसे दोषी ठहराया और फांसी की सजा सुनाई।
इस पूरे मामले में कोर्ट ने रोजाना सुनवाई की और केवल छह दिनों में गवाही और बहस पूरी कर ली गई। बच्ची के पिता ने भी न्याय की मांग करते हुए अदालत को पत्र लिखा था। इस फैसले ने पीड़ित परिवार को बड़ी राहत दी है।