बुजुर्ग माता-पिता के प्रति बेटों की बेरुखी: एक सबक
Gyanhigyan February 03, 2026 10:42 AM
बेटों ने बुजुर्ग माता-पिता को झोपड़ी में रहने पर मजबूर किया

कई माता-पिता अपने बच्चों का पालन-पोषण करते हैं, लेकिन कुछ बच्चे अपने माता-पिता की देखभाल नहीं कर पाते। चखली चौक में, पांच बेटों ने अपने 86 वर्षीय पिता हीरालाल साहू और उनकी विकलांग मां को झोपड़ी में रहने के लिए मजबूर कर दिया है। पिछले 15 वर्षों से ये बुजुर्ग दंपत्ति झोपड़ी में जीवन यापन कर रहे हैं। हीरालाल ने बताया कि उनके बेटों ने मिलकर खरीदी गई जमीन पर एक मकान बना लिया है और उन्हें घर से बेदखल कर दिया। इस मामले में हीरालाल ने अपने बेटों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है, जो सभी माता-पिता और बच्चों के लिए एक महत्वपूर्ण सबक है.


पुलिस कार्रवाई और बेटों की गिरफ्तारी

86 वर्षीय हीरालाल और उनकी पत्नी पिछले 15 सालों से झोपड़ी में रह रहे हैं। उन्होंने अपने बेटों से कई बार निवेदन किया कि उन्हें अपने घर में रखा जाए, लेकिन बेटों ने उनकी एक न सुनी। अंततः, हीरालाल ने चिखली थाने में अपने पांचों बेटों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने वरिष्ठ नागरिक सुरक्षा अधिनियम 2007 की धारा 24 के तहत मामला दर्ज किया और कार्रवाई शुरू की। हीरालाल पहले सरकारी प्रेस में काम करते थे और उन्होंने अपने नाम पर जमीन खरीदी थी, ताकि भविष्य में अपने बेटों और पोतों के साथ रह सकें। लेकिन बेटों ने उनकी सहमति के बिना उस जमीन पर मकान बना लिया। अब, पुलिस की कार्रवाई के बाद, हीरालाल अपने जमीन पर बने मकान में रहने की उम्मीद कर रहे हैं।


हीरालाल का परोपकार

हीरालाल ने झोपड़ी में रहने के बावजूद कई अच्छे कार्य किए हैं। उनका सबसे बड़ा परोपकार तब हुआ जब उन्होंने केरल के बाढ़ पीड़ितों के लिए 70 हजार रुपये का दान दिया। यह राशि उन्होंने अपने नौकरी के दौरान बचाई थी। माता-पिता को हमेशा सम्मान और प्यार मिलना चाहिए। इस घटना से आज की युवा पीढ़ी को सीख लेनी चाहिए और बुजुर्गों को अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने की प्रेरणा मिलनी चाहिए।


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