केरल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव कराए जाने हैं. ऐसे में वहां पर राजनीतिक हलचल बनी हुई है. चुनाव से पहले सभी प्रमुख गठबंधन अपने-अपने गठबंधन को मजबूत करने में जुटे हैं. बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए में पिछले महीने ट्वंटी20 पार्टी शामिल हो गई. इस बीच कांग्रेस की अगुवाई वाले गठबंधन में एक मांग के साथ थोड़ा तनाव बढ़ता दिख रहा है क्योंकि एक सहयोगी दल के एक नेता ने अपनी पार्टी के लिए उपमुख्यमंत्री पद की मांग की है.
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता और पूर्व विधायक केएनए खादर ने कल सोमवार को कहा कि अगर अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस का UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) केरल में सत्ता में आता है, तो उपमुख्यमंत्री पद पर उनकी पार्टी का हक बनता है.
‘प्रदर्शन को देखते हुए IUML DyCM पद का दावेदार’कोझिकोड में मीडिया से बात करते हुए खादर ने सोमवार को कहा कि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग राज्य में उपमुख्यमंत्री पद पाने के योग्य है. विधानसभा चुनावों में मुस्लिम लीग के प्रदर्शन को देखते हुए, उम्मीद है कि UDF के घटक दल इस मामले पर विचार जरूर करेंगे.
लीग के पूर्व विधायक ने कहा, “उन्हें उम्मीद है कि विधानसभा में गठबंधन को बहुमत मिलने के बाद UDF बिना किसी अनुरोध के ही यह पद उनकी पार्टी को दे देगा.” साथ ही उन्होंने यह भी कहा, “अगर घटक दलों की राय है कि मुस्लिम लीग को फ्रंट में उसका सम्मानजनक स्थान मिलना चाहिए, तो ऐसा होगा.”
IUML राज्य में DyCM पद का दावेदार नहींः सचिवउन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि UDF में शामिल सभी दल ऐसा करेंगे, और उन्होंने कहा कि उन्हें लगता है कि घटक दलों में यह विश्वास बना रहेगा.
हालांकि इससे पहले, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग के राष्ट्रीय सचिव, पीके कुन्हालीकुट्टी ने कहा था कि अगर UDF को विधानसभा चुनावों में बहुमत मिलता है, तो उनकी पार्टी उपमुख्यमंत्री पद की मांग नहीं करेगी. उन्होंने बताया कि पहले भी, जब ओमन चांडी ने मुस्लिम लीग को उपमुख्यमंत्री पद देने का वादा किया था, तो पार्टी ने इसे लेने से मना कर दिया था.
इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग केरल में कांग्रेस की अगुवाई वाले UDF का हिस्सा है. वह इस फ्रंट में लंबे समय से जुड़ा हुआ है. साल 2011 में लीग का प्रदर्शन बहुत ही शानदार रहा था. तब यहां पर हुए चुनाव में लीग को UDF की ओर से 23 सीटें दी गई थी जिसमें उसे 20 सीटों पर जीत हासिल हुई थी. लीग का केरल में यह सबसे शानदार प्रदर्शन भी है.
साल 2021 के चुनाव में कैसा रहा था प्रदर्शनसाल 2021 में केरल में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में वाम दलों का गठबंधन एलडीएफ अपनी सत्ता बचाने में कामयाब रहा था. 140 सीटों में से एलडीएफ को 94 सीटों पर जीत मिली थी. जबकि कांग्रेस के यूडीएफ को 40 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. यूडीएफ में कांग्रेस और लीग के अलावा 5 अन्य दलों ने भी चुनाव में अपने प्रत्याशी उतारे थे.
कांग्रेस को 93 सीटों में 21 सीटों पर जीत हासिल हुई जबकि लीग को 15 सीटों पर जीत हासिल हुई और उसने 25 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए थे. केरल कांग्रेस को 10 सीटों पर ही जीत हासिल कर सकी थी.
जबकि 2016 के विधानसभा चुनाव में तब की सत्तारुढ़ यूडीएफ को करारी हार का सामना करना पड़ा था. कांग्रेस को महज 22 तो लीग को 18 सीटों पर संतोष करना पड़ा था. चुनाव में एलडीएफ को 77 सीटों पर जीत हासिल हुई और उसने 5 साल के इंतजार को खत्म करते हुए सत्ता पर कब्जा जमाया. 2011 में हुए कड़े मुकाबले में कांग्रेस की अगुवाई वाला यूडीएफ सत्ता में लौटा था.