सुजीत कुमार, पटना| विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद नीतीश कुमार की सरकार ने अपना पहला पूर्ण बजट पेश कर दिया है. राज्य के वित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए लगभग 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट विधानसभा में रखा. यह बजट पिछले साल की तुलना में करीब 10 फीसदी ज्यादा है. इस बजट में राज्य सरकार ने किसानों, महिला सशक्तिकरण, युवाओं और रोजगार को फोकस में रखा है. सरकार ने दो लाख सरकारी नौकरियां देने और अगले पांच सालों में एक करोड़ लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का लक्ष्य दोहराया है.साथ ही बुनियादी ढांचे के विकास पर भी खास जोर दिया गया है.
संपन्न बिहार, समृद्ध बिहार की थीम पर पेश हुआ बजटवित्त मंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने बजट को “संपन्न बिहार, समृद्ध बिहार” की थीम पर पेश किया. उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में बिहार के बजट का आकार तेजी से बढ़ा है. साल 2005-06 में जहां राज्य का बजट करीब 26 हजार करोड़ रुपये था, वहीं 2025-26 में यह बढ़कर 3.17 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है. बजट भाषण के दौरान मखाना बोर्ड की स्थापना की घोषणा भी की गई. वित्त मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के ईमान, ज्ञान, समान, विज्ञान और अरमान के संकल्प के तहत राज्य सरकार काम कर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार की आर्थिक विकास दर लगातार बेहतर हो रही है.
सरकार ने सात निश्चय योजनाओं के जरिए बिहार को विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य तय किया है. इसके साथ ही बजट में पांच नए एक्सप्रेस-वे, सस्ते आवास और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े कई अहम प्रस्ताव शामिल किए गए हैं.
उठा नीट छात्रा की हत्या का भी मामलाइसके अलावा बिहार विधानसभा में नीट छात्रा की हत्या का मामला उठाया गया. काराकाट से सीपीआई माले के विधायक अरुण सिंह ने कहा कि पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल और परफेक्ट गर्ल्स हॉस्टल में रेप और हत्या जैसी घटना हुई है. यह चिंताजनक है कि शुरू से ही पुलिस और प्रशासन का रूप ऐसे मामले में नकारात्मक रहा है. पुलिस-प्रशासन पर इस जघन्य अपराधों को दबाने तथा इसमें शामिल रसूखदार व्यक्तियों को बचाने के गंभीर आरोप लगे हैं. व्यापक आंदोलन के बाद राज्य सरकार को सीबीआई जांच की अनुशंसा करनी पड़ी. न्याय की निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए मात्र सीबीआई जांच की अनुशंसा पर्याप्त नहीं है. आवश्यक है कि यह जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी सीटिंग जज के निगरानी में कराई जाए. जांच के लिए निश्चित समय-सीमा भी तय हो.
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