उत्तर प्रदेश सरकार ने संपत्ति का ब्योरा समय पर न देने वाले राज्य कर्मचारियों और अधिकारियों को चेतावनी जारी की है। मुख्य सचिव के निर्देश के अनुसार, ऐसे कर्मचारियों को जनवरी माह का वेतन मिलने के बाद आहरण वितरण अधिकारी (डीडीओ) पर भी कार्रवाई की जाएगी। यह कदम सरकारी कर्मचारियों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति का विवरण जमा करना सभी कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए अनिवार्य है। यह प्रक्रिया सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता बनाए रखने, हितों के टकराव (Conflict of Interest) से बचने और भ्रष्टाचार रोकने के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया है कि 31 जनवरी तक कुल 47,816 कर्मचारियों और अधिकारियों ने मानव संपदा पोर्टल पर अपनी संपत्ति का ब्योरा नहीं दिया है। इस गंभीर लापरवाही के मद्देनजर, अब सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केवल वेतन रोके जाने की धमकी ही पर्याप्त नहीं मानी गई, बल्कि इस मामले में डीडीओ और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी नियंत्रण और अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि संपत्ति का ब्योरा जमा न करना सरकारी नियमों का उल्लंघन है। यह न केवल कर्मचारियों की जवाबदेही पर सवाल उठाता है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता में भी बाधा डालता है। सरकारी नियमों के अनुसार, सभी कर्मचारियों को समय पर संपत्ति विवरण जमा करना अनिवार्य है और इसमें देरी करने पर कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई की जा सकती है।
मुख्य सचिव ने निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वेतन देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाए कि कर्मचारी ने संपत्ति का ब्योरा मानव संपदा पोर्टल पर जमा किया है। यदि कोई कर्मचारी ब्योरा नहीं देता है तो डीडीओ को उनकी वेतन प्रक्रिया रोकने और वरिष्ठ अधिकारियों को रिपोर्ट करने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कर्मचारियों द्वारा नियमों का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह कदम केवल एक चेतावनी नहीं है, बल्कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पारदर्शिता और अनुशासन सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। इसके तहत केवल कर्मचारियों को ही नहीं, बल्कि वेतन वितरण में शामिल अधिकारियों को भी जवाबदेह बनाया जाएगा।
इस निर्देश के बाद प्रशासन ने सभी विभागों में समीक्षा शुरू कर दी है। विभागीय अधिकारी और डीडीओ अपनी जिम्मेदारी सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हो गए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि इस कदम से सरकारी कर्मचारियों में समय पर संपत्ति विवरण जमा करने की प्रवृत्ति बढ़ेगी और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण में मदद मिलेगी।
इस प्रकार, मानव संपदा पोर्टल पर संपत्ति विवरण न देने वाले 47,816 कर्मचारियों और अधिकारियों की सूची पर कार्रवाई की प्रक्रिया तेज हो गई है। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त अनुशासनात्मक और प्रशासनिक कदम उठाए जाएंगे। इस कार्रवाई से उत्तर प्रदेश प्रशासन में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने का संदेश सभी सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को मिला है।