इंटरनेट डेस्क। सप्ताह का हर दिन किसी ना किसी भगवान का समर्पित होता है। ऐसे में मंगलवार का दिन बजरंगबली का है। जो भी बजरंगबली की पूजा करते हैं उनके लिए भगवान हमेशा कल्याण करते है। उनके भक्तों के लिए हनुमान चालीसा किसी सुरक्षा कवच से कम नहीं है। मान्यता है कि जो व्यक्ति लगातार हनुमान चालीसा का पाठ करता है, उसके जीवन से रोग, भय और शनि दोष जैसी बाधाएं अपने आप ही दूर हो जाती हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि बजरंगबली की समर्पित हनुमान चालीसा का पाठ किन परिस्थितियों में नहीं करना चाहिए।
कब-कब ना करें
शास्त्रों के अनुसार कुछ समय ऐसे हैं, जब हनुमान चालीसा का पाठ नहीं करना चाहिए। पैराणिक मान्यता है कि दोपहर के समय हनुमान जी लंका में होते हैं। इसलिए धार्मिक मान्यता है कि दोपहर के समय हनुमान चालीसा का पाठ करने से बचना चाहिए। कहा जाता है कि प्रभु श्री राम के वनवास काल के दौरान हनुमान जी ने विभीषण को वचन दिया था कि वे प्रतिदिन दोपहर में उनसे मिलने लंका जाएंगे।
जन्म एवं मृत्यु के समय
हिंदू धर्म में अशौच की स्थिति में पूजा-पाठ वर्जित होता है। परिवार में किसी की मृत्यु होने पर शोक काल रहता है। ऐसे में जब तक शुद्धि संस्कार पूर्ण न हो जाए, तब तक हनुमान चालीसा का पाठ या मूर्तियों का स्पर्श नहीं करना चाहिए। इसके अलावा घर में शिशु के जन्म के बाद भी कुछ दिनों तक सूतक काल रहता है।
मासिक धर्म के दौरान
महिलाओं के लिए मासिक धर्म के दिनों में हनुमान चालीसा का पाठ करना वर्जित माना गया है। शास्त्रों में इस समय को शारीरिक शुद्धि और विश्राम की अवधि माना जाता है। इस दौरान मानसिक जप किया जा सकता है।
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