Shivratri 2026: त्याग, अटूट विश्वास और युगों-युगों का इंतजार… शिव-शक्ति के मिलन की कहानी
TV9 Bharatvarsh February 04, 2026 11:43 AM

Mahashivratri 2026: सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का पर्व बहुत विशेष माना जाता है. ये त्योहार सिर्फ एक व्रत भर नहीं है, बल्कि शिव और शक्ति के मिलन का दिन है. इस साल यह पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाशिवरात्रि के दिन ही देवों के देव महादेव ने माता पार्वती को अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकारा था. शिव और माता पार्वती का मिलन इतना सरल नहीं था. शिव और शक्ति के मिलन की ये कथा त्याग, अटूट विश्वास और युगों-युगों के इंतजार की है. आइए जानते हैं कि कैसे शिव-शक्ति का विवाह हुआ?

कथा के अनुसार, देवी पार्वती अपने पिता दक्ष के द्वारा महादेव का अपमान सहन नहीं कर पाईं थीं. उन्होंने यज्ञ कुंड में कूदकर अपने प्राण दे दिए थे. इसके बाद सती के वियोग में शिव जी ध्यान में चले गए और संसार से दूर होकर हिमालय में समाधि ले ली. इधर शिव के बिना शक्ति अधूरी थी और शक्ति के बिना सारी सृष्टि का संतुलन बिगड़ गया.

देवी पार्वती ने लिया पुर्नजन्म

बाद में देवी पार्वती का पुर्नजन्म पर्वतराज हिमालय के यहां हुआ. उन्होंने पार्वती के रूप में ही जन्म लिया. देवी पार्वती बचपन से ही महादेव की परम भक्त थीं. जब वो बड़ी हुईं तो उन्होंने दृढ़ संकल्प ले लिया कि वो सिर्फ महादेव से ही विवाह करेंगी. इसके बाद नारद मुनि ने उनको बताया कि महादेव को सिर्फ कठिन तप करके ही पाया जा सकता है. चूंकि भक्ति से ही महादेव जाग सकते हैं.

नारद मुनि की बातें सुनकर देवी पार्वती ने सभी सुख त्याग दिए. वो हिमालय में जाकर तप करने लगीं. हजारों सालों तक उन्होंने केवल फल-फूल खाया. यही नहीं कई सालों तक वो सिर्फ जल पीकर रहीं. कुछ समय तक देवी ने सूखे पत्ते भी खाए, लेकिन बाद उन्होंने सूखे पत्ते खाने भी बंद कर दिए. इसलिए उन्हें ‘अपर्णा’ कहा गया. उनके तप के प्रभाव से महादेव ध्यान से उठ गए, लेकिन उन्होंने देवी पार्वती की परीक्षा ली.

शिव जी ने स्वीकार कर ली प्रार्थना

भगवान शिव ब्राह्मण रूप में देवी पार्वती के पास गए और स्वयं की ही निंदा करने लगे. उन्होंने कहा कि वह श्मशान निवासी, गले में सर्प लपेटने वाला औघड़ तुम्हारे योग्य नहीं है. इस पर देवी पार्वती को क्रोध आ गया. उन्होंने कहा कि मेरा प्रेम बाहरी रूप में आधारित नहीं है. मेरे प्रेम का आधार शिव का आत्मस्वरूप है. देवी पार्वती का भाव देख महादेव अपने असली रूप में आ गए और उनकी प्रार्थना मान ली.

इसके बाद फाल्गुन महीने के कृष्ण चतुर्दशी के दिन भगवान शिव एक अनोखी बारात लेकर माता पार्वती के यहां पहुंचे. शिव जी की बारात में देवता, गंधर्व, भूत-प्रेत और नंदी आदि शामिल हुए थे. फाल्गुन महीने के कृष्ण चतुर्दशी के दिन शिव और शक्ति का विवाह हुआ था.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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