मणिपुर में सरकार बनाने का दावा बुधवार को भाजपा और एनडीए विधायकों ने पेश किया है. इस मौके पर राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और नॉर्थ ईस्ट प्रभारी संबित पात्रा के नेतृ्त्व में राज्यपाल अजय कुमार भल्ला से मुलाकात की गई है. इस दौरान विधायको में दल के नेता युमनाम खेमचंद सिंह और अन्य विधायक भी मौजूद रहे. युमनाम खेमचंद सिंह ही मणिपुर के नए मुख्यमंत्री होंगे. इसी के साथ राज्य में लगा एक साल से राष्ट्रपति शासन हटा दिया गया है. केंद्र ने निर्देश जारी कर दिए हैं.
मणिपुर में पिछले एक साल से फैली अशांति के कारण राष्ट्रपति शासन लागू था. अब एक निर्वाचित सरकार के गठन से वहां शांति बहाल की उम्मीदें हैं. मणिपुर विधानसभा में 60 सदस्य हैं. इनका कार्यकाल साल 2027 तक है. मणिपुर में पिछले साल 13 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था. उस दौरान राज्य में जातीय हिंसा की वजह से मुख्यमंत्री रहे एन बीरेन सिंह को इस्तीफा देना पड़ा था. उनके इस्तीफे के चार दिन बाद ही राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिय गया था.
इन्हें बनाया जाएगा उपमुख्यमंत्री, बीरेन सिंह ने दिया था सीएम पद से इस्तीफा
इस सरकार में सबसे बड़ी बात जो है, वो है नेमचा किपगेन, जिन्हें उपमुख्यमंत्री के रूप में नियुक्ति है. वह कुकी समुदाय से आती हैं. उन्हें इस पद पर इसलिए बैठाया जा रहा है, क्योंकि वह जातीय तनाव कम करने की दिशा में अहम कदम उठा सकेंगी. इससे पहले विधायक दल की बैठक की गई थी. इसमें खेमचंद सिंह को नेता चुना गया था. वह सीएम पद की दौड़ में सबसे आगे हैं. यह सारा संतुलन जातीय हिंसा को रोकने के लिए अहम कदम माना जा रहा है.
साल 2023 में जातीय हिंसा मणिपुर में शुरू हुई थीं. तब मुख्यमंत्री बीरेन सिंह राजनीतिक रूप से कमजोर नजर आए थे. वहां मैतेई और कुकी समुदाय के बीच इस हिंसा की शुरुआत हुई थी. तब बीरेन सिंह पर पक्षपात का आरोप लगा था. उनके इस्तीफे की मांग शुरू हो गई थी. इसकी गूंज पार्टी के अंदर भी सुनाई देने लगी थी. हिंसा जैसे-जैसे बढ़ती गई थी, बीरेन सिंह पर लगातार पद से इस्तीफा देने का दबाव बढ़ता जा रहा था.