केंद्र सरकार ने बजट सत्र के पांचवें दिन मंगलवार (3 फरवरी, 2026) को चर्चा के दौरान संसद को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत दर्ज मामलों में कार्रवाई और सजा तय करने के बारे में जानकारी साझा की है. सरकार ने संसद को बताया कि ईडी के PMLA के तहत दर्ज मामलों में सजा का दर 94.82 प्रतिशत है.
इसके साथ अब तक अदालतों ने कुल 58 मामलों में अपना फैसला सुनाया है. जिसमें से 55 मामलों में 123 आरोपियों को दोषी ठहराया जा चुका है. वहीं, पिछले पांच सालों में 55 मामलों में से 43 मामलों में 104 आरोपियों को सजा भी हो चुकी है.
58 में से 55 मामलों में पारित हो चुके दोषसिद्धि के आदेश
संसद के बजट सत्र के दौरान राज्यसभा में समाजवादी पार्टी के सांसद रामजी लाल सुमन की ओर से उठाए गए सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा, ’31 दिसंबर, 2025 तक पीएमएलए की विशेष अदालतों ने मनी लॉन्ड्रिंग के मुद्दे पर 58 मामलों में मेरिट्स के आधार पर फैसले सुनाए हैं. इनमें से 55 मामलों में दोषसिद्धी के आदेश पारित किए गए, जिनमें 123 आरोपी दोषी पाए गए. इस तरह से इन मामलों में सजा का 94.82 प्रतिशत पाया गया है.’
PMLA के लागू होने के बाद से अब तक कितने मामले हुए दर्ज?
उन्होंने कहा, ‘ईडी ने 2020-21 से अब तक कुल 43 मामलों में दोषसिद्धि सुनिश्चित की है, जिनमें 104 आरोपियों को PMLA के तहत सजा दी गई है. 2002 में PMLA लागू होने के बाद से ED ने कुल 8,391 मामले दर्ज किए हैं. इनमें से 1,960 मामलों में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और 1,278 मामलों में जांच को बंद कर दिया गया है.’
ईडी में जांच में देरी को लेकर क्या बोले केंद्रीय मंत्री
वहीं, ईडी की जांच में देरी को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि एजेंसी मनी लॉन्ड्रिंग के जोखिम और खतरों के आधार पर बहु-आयामी रणनीति अपनाकर मामले दर्ज करती है और कई तरह के स्रोतों से प्राप्त जानकारियों की गहनता से जांच करती है.
उन्होंने कहा, ‘मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में जांच पूरी हो जाने के बाद स्पेशल कोर्ट में अभियोजन शिकायत दाखिल की जाती है. जांच को तेज करने और मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा सुनिश्चित करने के लिए तकनीक के व्यापक इस्तेमाल पर जोर दिया गया है. इसमें राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय डेटाबेस, फॉरेंसिक टूल्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), OSINT (ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस) तकनीक और डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल शामिल है, ताकि इन बेहद महत्वपूर्ण मामलों में सबूतों को मजबूत किया जा सके, उसकी विश्लेषण करने की क्षमता बढ़ाई जा सके और जटिल वित्तीय अपराधों की जांच को तेजी से पूरा किया जा सके.’
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