'SIR के डर से 107 मौतों का दावा', बंगाल विधानसभा में ममता सरकार का बड़ा प्रस्ताव
Navjivan Hindi February 05, 2026 10:43 PM

पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर विवाद जारी है। गुरुवार, 5 फरवरी 2026 को राज्य विधानसभा में एक अहम प्रस्ताव पेश किया गया, जिसमें स्पेशल इंटेनसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को लेकर लोगों में फैले डर और मानसिक दबाव पर गंभीर सवाल उठाए गए।

प्रस्ताव में दावा किया गया है कि इसी डर और असुरक्षा की वजह से अब तक 107 लोगों की मौत हो चुकी है। यह दावा सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।

नियम 169 के तहत पेश हुआ प्रस्ताव

यह प्रस्ताव पश्चिम बंगाल के संसदीय कार्य मंत्री शोवनदेब चट्टोपाध्याय ने विधानसभा में नियम 169 के तहत रखा। प्रस्ताव में कहा गया कि चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के नाम पर राज्य में भय का वातावरण बन गया है।

सरकार का आरोप है कि बड़ी संख्या में लोग इस आशंका से परेशान हैं कि कहीं उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा न दिया जाए। इसी चिंता ने लोगों पर इतना मानसिक दबाव डाला कि कई मामलों में जान जाने तक की नौबत आ गई।

मानसिक दबाव और आत्महत्या के आरोप

प्रस्ताव में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन 107 मौतों का दावा किया जा रहा है, उनमें आत्महत्या के मामले भी शामिल हैं। सरकार का कहना है कि लगातार बनी अनिश्चितता और डर ने लोगों की मानसिक स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया है।

राज्य सरकार का आरोप है कि मतदाता सूची से नाम कटने की आशंका ने आम लोगों के बीच असुरक्षा की भावना को और गहरा कर दिया है।

ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, NRC से जोड़ा SIR

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस मुद्दे पर केंद्र सरकार और चुनावी प्रक्रिया पर तीखा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि SIR के डर की वजह से रोजाना 3 से 4 लोग आत्महत्या कर रहे हैं।

ममता बनर्जी ने SIR को लेकर यह भी कहा कि यह NRC को लागू करने का पिछला दरवाजा है। उनके मुताबिक, मतदाता सूची के पुनरीक्षण की आड़ में लोगों की नागरिकता पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं, जिससे डर का माहौल बन रहा है।

चुनाव से पहले बढ़ी चिंता

राज्य सरकार का कहना है कि चुनाव से पहले इस तरह की प्रक्रिया से लोकतांत्रिक माहौल प्रभावित हो रहा है। प्रस्ताव के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि डर और असुरक्षा के बीच निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है।

अब इस मुद्दे पर विधानसभा के भीतर और बाहर राजनीतिक टकराव और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।

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