नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। डीएमके मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम के उत्तर भारतीयों को लेकर दिए गए बयान पर देश की राजनीति गरमा गई है। इस बयान की सत्तापक्ष और विपक्ष के कई नेताओं ने आलोचना की है और इसे देश की एकता के खिलाफ बताया है।
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने कहा कि कुछ नेता सिर्फ सुर्खियों में बने रहने के लिए ऐसे बयान देते हैं। एनडीए सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सबका साथ, सबका विकास' के सिद्धांत पर आगे बढ़ रही है। ऐसे बयान देश की सोच और दिशा को नहीं बदल सकते।
भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने डीएमके मंत्री के बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया। उन्होंने कहा, "हमारे देश का मूल मंत्र विविधता में एकता है। इस तरह के ऊंचे राजनीतिक पदों से दिए गए बयान बहुत ही नकारात्मक सोच को दिखाते हैं।"
उन्होंने आरोप लगाया कि डीएमके और उसके सहयोगी जानते हैं कि वे चुनाव में बुरी तरह हारने वाले हैं, इसलिए आखिरी कोशिश के तौर पर समाज में निराशा और उत्तर-दक्षिण के बीच विभाजन फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।
समाजवादी पार्टी के सांसद अवधेश प्रसाद ने दिल्ली में इस बयान को सीधे तौर पर राष्ट्र का अपमान करार दिया। उन्होंने कहा, "यह देश उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम, सभी दिशाओं से मिलकर बना है। यहां अलग-अलग भाषा, पहनावा और संस्कृति के लोग रहते हैं। इसी विविधता के बावजूद हमारा देश भारत कहलाता है और यही इसकी असली पहचान है।"
बिहार सरकार के मंत्री दीपक प्रकाश ने भी डीएमके मंत्री के बयान की कड़ी निंदा की। उन्होंने कहा, "इस तरह के बयान किसी भी राजनेता को शोभा नहीं देते। देश में एकता और भाईचारे का माहौल होना चाहिए। ऐसे बयानों की सख्त निंदा की जानी चाहिए।"
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने इस पूरे मामले पर थोड़ा संतुलित रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि डीएमके मंत्री का इरादा अपमान करने का रहा होगा। उन्होंने कहा, "उत्तर भारत से लोग दूर-दराज के इलाकों में मजदूरी करने जाते हैं, क्योंकि रोजगार की मजबूरी होती है। यह बात हम भी कहते हैं और सभी जानते हैं। बिहार में पलायन सबसे ज्यादा है।"
उन्होंने यह भी कहा कि हाल ही में चुनाव हुए हैं, जिनमें पलायन रोकने और ठोस योजनाएं बनाने के वादे किए गए थे।
एआईएडीएमके के राष्ट्रीय प्रवक्ता कोवई सत्यान ने डीएमके पर दोहरे रवैये का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "यह बयान बेहद निंदनीय है और डीएमके की मानसिकता को दिखाता है। ईरोड उपचुनाव के दौरान डीएमके ने प्रवासी मजदूरों से वोट मांगने के लिए घर-घर जाकर संपर्क किया, हिंदी में पोस्टर छपवाए और समर्थन पाने के लिए हर हद तक गई।"
उन्होंने कहा कि वोट के लिए डीएमके किसी भी स्तर तक जा सकती है।
बता दें कि एक सार्वजनिक कार्यक्रम में डीएमके मंत्री एमआरके पन्नीरसेल्वम ने कहा था कि उत्तर भारत के लोग, जो केवल हिंदी जानते हैं, तमिलनाडु में 'टेबल साफ करने,' 'निर्माण कार्यों' में मजदूरी करने, और 'पानी पूरी बेचने' के लिए आते हैं।
--आईएएनएस
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