आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि एनडीडीबी और एसआईटी की रिपोर्टें तिरुमला लड्डू प्रसादम में उपयोग किए गए घी की तैयारी में गंभीर अनियमितताओं को स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं. उन्होंने बताया कि एसआईटी की जांच में सामने आया है कि घी का निर्माण रसायनों और पाम ऑयल का उपयोग कर किया जा रहा था, और कुछ घटकों में पशु वसा से प्राप्त तेलों का इस्तेमाल किया गया, जो धार्मिक पवित्रता के प्रति चौंकाने वाली असंवेदनशीलता को दर्शाता है.
मुख्यमंत्री ने इसे जानबूझकर किया गया अपवित्र कृत्य बताते हुए कहा कि यह किसी व्यक्ति की निजी आस्था का मामला नहीं है, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं को गहरी ठेस पहुंचाने वाला विषय है. उन्होंने इसे अनाचार और गंभीर पाप करार देते हुए कहा कि इतिहास में कभी किसी ने भी भगवान वेंकटेश्वर के मंदिर की पवित्रता से छेड़छाड़ नहीं की. यहां तक कि ब्रिटिश शासन के दौरान भी, जब परंपराओं और अभिलेखों को और अधिक सुदृढ़ किया गया था.
माफी की मांगों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि इस तरह के तर्क अहंकार, संवैधानिक मूल्यों के प्रति अनादर और राजनीतिक गुंडागर्दी को दर्शाते हैं. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सीबीआई रिपोर्ट में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि मिलावट नहीं हुई और दोहराया कि यह मुद्दा राजनीति का नहीं, बल्कि आस्था, पवित्रता और जवाबदेही से जुड़ा हुआ.
खामियों की जांच के लिए समिति गठित: नायडू
एनडीए नेताओं की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अपने उंडावल्ली स्थित आवास पर बोलते हुए मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य सरकार को चार्जशीट प्राप्त हो चुकी है. उसका नंबर अभी तक सूचित नहीं किया गया है. उन्होंने बताया कि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने भी एक रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं.
मुख्यमंत्री ने कहा कि सीबीआई के पत्राचार के आधार पर सरकार ने रिपोर्ट की व्यापक जांच करने, खामियों की पहचान करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए एक एकल सदस्यीय समिति का गठन किया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि समिति द्वारा समीक्षा पूरी होने के बाद, उसकी सिफारिशों के अनुरूप सरकार उचित कार्रवाई करेगी.