गाजियाबाद में तीन बहनों द्वारा आत्महत्या किए जाने के मामले में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने पुलिस और परिवार के साथ-साथ आम जनता को भी सन्न कर दिया है। मरने से पहले लड़कियों ने 18 पन्नों का एक भावुक सुसाइड नोट छोड़ा है, जिसमें उनके दिल का वो दर्द बाहर आया है जिसे वे लंबे समय से दबाए बैठी थीं। यह मामला सिर्फ एक सुसाइड का नहीं, बल्कि एक गहरे मानसिक जुनून की कहानी कहता है।
कोरियन कल्चर के लिए दीवानगी बनी जान की दुश्मनजांच में पता चला है कि तीनों बहनें पूरी तरह से दक्षिण कोरियाई संस्कृति (Korean Culture) के रंग में रंग चुकी थीं। उनकी दीवानगी इस कदर थी कि वे खुद को भारतीय नहीं बल्कि ‘कोरियन’ मानती थीं। उन्होंने किसी क्लास के बजाय यूट्यूब के जरिए कोरियन भाषा बोलना और समझना सीखा था। उनके कमरे से लेकर उनकी सोच तक, सब कुछ कोरियन लाइफस्टाइल के इर्द-गिर्द घूमता था।
पिता के नाम भावुक चिट्ठी: ‘कोरियन ही हमारी जान थी’सुसाइड नोट के पन्ने लड़कियों के मानसिक द्वंद्व को बयां कर रहे हैं। उन्होंने अपने पिता को संबोधित करते हुए लिखा, “पापा, आप हमसे हमारा कोरियन कल्चर छुड़वाना चाहते थे, लेकिन वही हमारी जान थी।” लड़कियों ने साफ तौर पर लिखा कि उन्हें हिंदुस्तानी लड़के बिल्कुल पसंद नहीं थे। सुसाइड नोट में एक जगह लिखा है, “हमारी पसंद और प्यार सिर्फ कोरियन कल्चर ही था। ऐसे में हम किसी इंडियन लड़के से शादी कैसे कर सकते हैं?”
सांस्कृतिक टकराव और मानसिक दबाव का नतीजासुसाइड नोट से यह भी संकेत मिले हैं कि घर में उनके इस जुनून को लेकर काफी तनाव रहता था। परिवार चाहता था कि वे अपनी जड़ों से जुड़ें और सामान्य भारतीय जीवन जिएं, लेकिन लड़कियों के लिए यह मुमकिन नहीं था। वे अपनी काल्पनिक कोरियन दुनिया से बाहर आने को तैयार नहीं थीं। इसी सांस्कृतिक टकराव और भविष्य की चिंता (खासकर शादी के दबाव) ने उन्हें मौत के करीब धकेल दिया। फिलहाल पुलिस हैंडराइटिंग एक्सपर्ट्स की मदद से नोट की जांच कर रही है और मामले की तह तक जाने की कोशिश में जुटी है।