Pariksha Pe Charcha : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम में छात्रों से खुलकर संवाद करते हुए पढ़ाई, जीवन और सफलता को लेकर कई अहम मंत्र दिए। ये बातें सिर्फ परीक्षा ही नहीं, बल्कि पूरे जीवन के लिए दिशा देने वाली हैं। 10 बातों में जानिए यह कार्यक्रम छात्रों के लिए क्यों खास था? एक तरफ झुकोगे तो गिरोगे
उन्होंने कहा कि हर चीज में संतुलन होना चाहिए। एक तरफ झुकोगे तो गिरोगे ही गिरोगे। 2 प्रकार के स्किल हैं। एक है लाइफ स्किल और दूसरा प्रोफेश्नल स्किल। उसमें भी कोई मुझसे पूछेगा कि किसी पर ध्यान देना चाहिए, मैं कहूंगा कि दोनों पर ध्यान देना चाहिए। बिना अध्ययन और ऑब्जरवेशन किए और बिना ज्ञान प्रयुक्त किए कोई भी स्किल आ सकता है क्या? स्किल की शुरुआत तो ज्ञान से ही होती है, उसका महत्व कम नहीं है।
उन्होंने कहा कि सपने न देखना एक क्राइम है। सपने देखने ही चाहिए, लेकिन सपनों को गुनगुनाते रहना कभी काम नहीं आता है। इसलिए, जीवन में कर्म को ही प्रधान मानना चाहिए।
टाइम मैनेजमेंट का रखें ध्यानपीएम मोदी ने टाइम मैनेजमेंट को लेकर कहा कि रात को सोने से पहले डायरी में लिखें कि कल क्या करना है और फिर रात में टेली करो कि आज कौन-कौन से काम किए या नहीं। फिर सोचे कि आज टाइम कहां खराब किया और क्यों काम नहीं कर पाए। ऐसे में समय का सही उपयोग करें और टाइम मैनेजमेंट का ध्यान रखें।
पैटर्न बदली लेकिन मूल पैटर्न को नहीं छोड़ाउन्होंने कहा कि जब परीक्षा पे चर्चा मैंने शुरू किया, तो एक पैटर्न था। अब धीरे-धीरे में उसे बदलता जा रहा हूं, इस बार मैंने अलग-अलग राज्यों में भी किया। मैंने भी अपनी पैटर्न बदली, लेकिन मूल पैटर्न को नहीं छोड़ा।
हमारे देश में बोर्ड के एग्जाम में नंबर लाने वाले बच्चे छोटे-छोटे गांव से हैं, पहले बड़े परिवार और बड़ी स्कूल के बच्चे ही नंबर लाते थे। अभी कुछ दिन पहले में ब्लाइंड क्रिकेट टीम की बच्चियों से मिला, वो जीतकर आई थीं, जब मैंने उनको सुना तो मेरी आंखों में आंसू आ गए। उनके पास घर नहीं है, और वो ब्लाइंड हैं, खेलना सीखा और दिव्यांग होने के बावजूद भी वो यहां तक पहुंची। हमें इस भ्रम में नहीं रहना चाहिये कि कंफर्ट झोनही जीवन बनाता है, जीवन बनता है, जिन्दगी जीने के तरीके से।
बचे हुए वर्ष गिनते हैं मोदीप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अभी मेरे जन्मदिन पर 17 सितंबर को एक नेता ने फोन किया और कहा कि आपके 75 साल हो गए, तो मैंने उसे कहा कि 25 अभी बाकी हैं। मैं बीते हुए को नहीं, बल्कि बचे हुए को गिनता हूं।
12वीं पर देना चाहिएइस सवाल पर पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे में ज्यादा ध्यान 12वीं पर देना चाहिए। अगर आप 12वीं की अच्छे से तैयारी कर लेंगे तो आगे भी फायदा मिलेगा। माता-पिता चाहते हैं कि उम्र से पहले काफी कुछ हो जाए, लेकिन बच्चों को खिलने के लिए वक्त देना चाहिए।
गेमिंग प्लेटफॉर्म का समझदारी से इस्तेमाल करेंपीएम मोदी ने छात्रों से कहा कि गेमिंग प्लेटफॉर्म का समझदारी से इस्तेमाल करना चाहिए। सिर्फ मजे के लिए गेम खेलना ठीक नहीं है। गेमिंग एक स्किल है, ऐसे में नए गेमिंग पर काम करना चाहिए और नए गेम बनाने पर भी ध्यान देना चाहिए। बच्चें सट्टेबाजी वाले गेम्स पर दूर रहें।
याद नहीं रहते टॉपर्स के मार्क्सपीएम मोदी ने बताया कि मार्क्स एक अलग बीमारी बन गई है। टॉपर्स के भी नाम याद नहीं रहते हैं। इसका मतलब है कि इसका कुछ समय के लिए ही है। इसलिए हम अपने मन को नंबर, मार्क्स से जोड़ने के बजाय मेरा जीवन कहां जाए, इसके लिए खुद को कसते रहना चाहिए।
टीचर्स से क्या बोले मोदीप्रधानमंत्री ने कहा कि टीचर का प्रयास रहना चाहिए कि स्टूडेंट की स्पीड इतनी है, मेरी स्पीड उससे एक कदम ज्यादा रहनी चाहिए। हमारा लक्ष्य ऐसा होना चाहिए, जो पहुंच में हो, लेकिन पकड़ में न हो। उन्होंने कहा कि मन को जोतो, फिर मन को जोड़ो और फिर आपको पढ़ाई के जो विषय रखने हों, रखो। फिर आप स्टूडेंट को हमेशा सफल पाएंगे।