
New Delhi, 6 फरवरी . भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी Friday को मुख्य पॉलिसी रेट को लेकर अपना फैसला सुनाने वाली है. अर्थशास्त्रियों का मानना है कि दिसंबर 2025 में ब्याज दर घटाने के बाद फरवरी में रिजर्व बैंक फिलहाल कोई बदलाव नहीं करेगा. हालांकि, बैंक आगे की नीति को लेकर क्या संकेत देता है, इस पर सभी की नजर रहेगी.
तीन दिन तक चलने वाली भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक Wednesday से शुरू हो चुकी है. डीबीएस बैंक की एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और वरिष्ठ अर्थशास्त्री राधिका राव के अनुसार, मजबूत आर्थिक वृद्धि और अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के बाद वैश्विक जोखिम कम होने से रिजर्व बैंक आने वाले समय को ध्यान में रखते हुए लचीली नीति अपना सकता है.
राव ने कहा, “महंगाई कम होने और रुपये पर दबाव बने रहने के बावजूद, डिपॉजिट जुटाने की चुनौतियों और पोर्टफोलियो आउटफ्लो के जोखिम को देखते हुए आगे रेट कट से बचा जा सकता है.”
अनुमान है कि रिजर्व बैंक नकदी प्रबंधन, बॉन्ड बाजार को स्थिर रखने और मुद्रा प्रबंधन जैसे उपायों पर ज्यादा ध्यान देगा. इस तिमाही और अप्रैल से जून 2026 के दौरान Governmentी बॉन्ड की खरीद जारी रह सकती है.
उम्मीद है कि आरबीआई डायरेक्ट लिक्विडिटी, बॉन्ड स्थिरता और करेंसी मैनेजमेंट उपायों पर निर्भर रहेगा, जिसमें इस तिमाही और अप्रैल-जून 2026 में बॉन्ड खरीदारी जारी रहेगी.
अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, नीतिगत ब्याज दर में ढील के बावजूद हाल के समय में Governmentी बॉन्ड की यील्ड में लगातार तेजी देखने को मिली है. इसी वजह से रिजर्व बैंक अपनी मौद्रिक नीति में यथास्थिति बनाए रख सकता है.
एसबीआई रिसर्च की एक रिपोर्ट में कहा गया है, “हमारा मानना है कि पात्र सिक्योरिटीज का चुनाव ही ओएमओ ऑपरेशंस की प्रभावशीलता को प्रभावित कर सकता है, भले ही लिक्विडिटी इंजेक्शन की कुल मात्रा अपरिवर्तित रहे.” इसमें आगे कहा गया है, “इसलिए आरबीआई आगामी पॉलिसी में यथास्थिति बनाए रखेगा.”
पिछली मौद्रिक नीति के बाद सबसे बड़ा बदलाव India और यूरोपीय संघ के साथ-साथ India और अमेरिका के बीच हुआ व्यापार समझौता है. इस समझौते के बाद India पर लगने वाला शुल्क 50 प्रतिशत से घटकर 18 प्रतिशत रह गया है.
एसबीआई रिसर्च के अनुसार, अब India एशियाई देशों में सबसे कम शुल्क वाले देशों में शामिल हो गया है. इससे भारतीय उत्पादों की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात को मजबूती मिलेगी.
–
एएस/