यमुनानगर: इस देश में श्रवण जैसे पुत्र हुए हैं जिन्होंने अपने नेत्रहीन माता-पिता की इच्छा पूरी करने के लिए उन्हें अपने कंधों पर उठाकर सभी तीर्थो की यात्रा करवाई थी। लेकिन आज एक कलयुगी पुत्र ने प्रॉपर्टी के लालच में आकर अपने जिंदा पिता को ही मृत घोषित कर दिया। यही नहीं उसका अंतिम संस्कार और अस्थि विसर्जन भी करवा दिया। हैरान करने वाला यह मामला अब उस वक्त प्रकाश में आया जब बदकिस्मत पिता इंसाफ के लिए एसपी यमुनानगर के पास पहुंचा।
पिता ने बताई पूरी बात
पिता का आरोप है कि उसके बेटे ने प्रॉपर्टी पर कब्जे की मंशा से यह कदम उठाया। उसे यह भी पता चला है कि हरिद्वार में पिंडदान कराने के साथ-साथ पंडों के रजिस्टर में भी उसका नाम मृतक के रूप में दर्ज करवा दिया गया। ये खबर आप हिमाचली खबर में पढ़ रहे हैं। पिता मामचंद ने एसपी कमलदीप गोयल को लिखित शिकायत दर्ज करवा दी है। आरोप यह भी है कि उसके बेटे महेश के साथ कई अन्य लोग भी इस षड़यंत्र में शामिल है। मामचंद ने बताया कि उनकी पत्नी का दो वर्ष पहले निधन हो चुका है। उनके दो बेटे और एक बेटी हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। दोनों बेटों को अलग-अलग मकान बनाकर दिए गए थे। बड़े बेटे महेश का व्यवहार लंबे समय से ठीक नहीं था और वह आए दिन झगड़ा करता था। इसी कारण उसे घर से बेदखल कर दिया गया था।
पिता गए देहरादून, बेटे ने फैला दी मौत की खबर
पिता के अनुसार बेटे की प्रताड़ना से परेशान होकर वह उत्तराखंड के विकासनगर चले गए थे, जहां राज मिस्त्री के पास काम कर रहे थे। इसी दौरान बेटे ने गांव में उनकी मौत की अफवाह फैलाई, लोगों को बुलाकर क्रियाकर्म कराया और सामाजिक रूप से उन्हें मृत घोषित कर दिया। वहीं आरोपी बेटे महेश ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उसके पिता शराब के आदी हैं, और मां के साथ भी उनका व्यवहार ठीक नहीं था। उसने दावा किया कि प्रॉपर्टी का विवाद नहीं है और हरिद्वार में पिंडदान की बात गलत है, हालांकि उसने यह स्वीकार किया कि उसने अपने पिता से संबंध तोड़ने का फैसला किया है। फिलहाल पुलिस ने पिता की शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू कर दी है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि यह पूरा मामला संपत्ति के लालच का है या पारिवारिक विवाद का।