अच्युतानंदन का परिवार नहीं लेगा पद्म विभूषण, सम्मान लेने से क्यों किया मना?
TV9 Bharatvarsh February 07, 2026 01:43 PM

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और सीपीएम के वरिष्ठ नेता रहे वी. एस. अच्युतानंदन को मरणोपरांत पद्म विभूषण दिया गया है. हालांकि अब यह भी साफ हो गया है कि उनका परिवार इस सम्मान को स्वीकार नहीं करेगा. ऐसा न करने के पीछे की वजह कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) की वह विचारधारा है. इसके तहत पार्टी के नेता सरकारी सम्मानों को स्वीकार नहीं करते हैं.

सीपीएम के महासचिव एम. ए. बेबी ने भी इसको लेकर अपना और अपनी पार्टी का रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने कहा कि पार्टी का रुख साफ है कि अच्युतानंदन के परिवार को यह सम्मान स्वीकार नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार पार्टी के निर्णय के अनुरूप ही अंतिम फैसला लेगा.

बेबी ने कहा कि अगर वी. एस. अच्युतानंदन जीवित होते, तो वे स्वयं भी यह पुरस्कार स्वीकार नहीं करते, क्योंकि वे हमेशा पार्टी की विचारधारा और सिद्धांतों पर अडिग रहा करते थे. ऐसे में उनका परिवार भी उनके ही जैसा फैसला ले सकता है.

घोषणा के समय परिवार ने जताई थी खुशी

पद्म विभूषण की घोषणा जिस समय की गई थी. उस समय परिवार और पार्टी ने इस फैसले पर खुशी जाहिर की थी. अच्युतानंदन के परिवार ने इसे उनके समाज के लिए लंबे योगदान की मान्यता बताते हुए स्वागत किया था. हालांकि बाद में पार्टी हाईकमान के फैसले पर ही परिवार चलता नजर आ रहा है.

परिवार ने क्या लिया फैसला?

वी. एस. अच्युतानंद के बेटे वी. ए. अरुण कुमार की तरफ से भी अपना रुख स्पष्ट कर दिया है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि पार्टी की तरफ से जो फैसला लिया जाएगा. वही फैसला हमल लोग भी जानेंगे. गुरुवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में अरुण कुमार ने बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से परिवार को पद्म विभूषण दिए जाने की औपचारिक सूचना मिल चुकी है.

उन्होंने कहा कि परिवार इसे उनके पिता के योगदान का सम्मान मानता है. लेकिन, साथ ही यह भी साफ किया कि सीपीएम की वैचारिक नीति सरकारी सम्मानों को स्वीकार करने के खिलाफ है.

पार्टी की फैसला ही सर्वोपरि

अरुण कुमार ने लिखा, एक कम्युनिस्ट के तौर पर मेरे पिता हमेशा पार्टी के सिद्धांतों पर ही चले हैं. परिवार भी पार्टी के फैसले और उनके आदर्शों के साथ खड़ा रहेगा. लोगों के दिलों में उन्हें जो सम्मान मिला है, वह किसी भी सरकारी पुरस्कार से बड़ा है.

हालांकि इस मामले में सीपीएम की ओर से अभी तक कोई औपचारिक प्रस्ताव जारी नहीं किया गया है. लेकिन, पार्टी नेतृत्व के रुख से यह साफ है कि वी. एस. अच्युतानंदन के नाम घोषित पद्म विभूषण को स्वीकार नहीं किया जाएगा.

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