मृत्यु के बाद आधार कार्ड को निष्क्रिय करना क्यों है बेहद जरूरी
JournalIndia Hindi February 09, 2026 03:42 PM

आधार कार्ड आज भारत में पहचान का सबसे अहम दस्तावेज बन चुका है। बैंक खाते, पेंशन, बीमा, सब्सिडी, मोबाइल कनेक्शन और सरकारी योजनाएं—लगभग हर जरूरी सेवा आधार से जुड़ी हुई है। इसी वजह से, किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका आधार कार्ड सक्रिय रह जाना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।

इसलिए आधार को निष्क्रिय कराना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि परिवार की एक अहम जिम्मेदारी है।

यूआईडीएआई की बड़ी पहल

आधार प्रणाली को सुरक्षित और पारदर्शी बनाए रखने के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) अब तक 2.5 करोड़ से अधिक मृत व्यक्तियों के आधार नंबर निष्क्रिय कर चुका है। इसका उद्देश्य फर्जीवाड़े को रोकना, डुप्लीकेट पहचान खत्म करना और सरकारी लाभों को सही लोगों तक पहुंचाना है।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, आधार रिकॉर्ड को अपडेट रखना देश की डिजिटल व्यवस्था में भरोसा बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी है।

आधार निष्क्रिय करना क्यों जरूरी है?

अगर किसी मृत व्यक्ति का आधार कार्ड सक्रिय रहता है, तो उसका दुरुपयोग होने की संभावना बढ़ जाती है। कुछ लोग गलत तरीके से पेंशन, सब्सिडी या अन्य सरकारी लाभ लेने की कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा, आधार विवरण का इस्तेमाल कर फर्जी बैंक खाते या वित्तीय धोखाधड़ी भी की जा सकती है।

समय पर आधार निष्क्रिय कराने से यह सुनिश्चित होता है कि सरकारी संसाधनों का गलत इस्तेमाल न हो और लाभ केवल वास्तविक पात्र लोगों तक पहुंचे।

ऑनलाइन और आसान प्रक्रिया

यूआईडीएआई ने इस प्रक्रिया को परिवारों के लिए सरल और पूरी तरह ऑनलाइन बना दिया है। myAadhaar पोर्टल पर जाकर “परिवार के सदस्य की मृत्यु की सूचना” विकल्प के माध्यम से आधार निष्क्रिय कराया जा सकता है।

इस प्रक्रिया में सूचना देने वाले व्यक्ति को अपनी पहचान सत्यापित करनी होती है और मृतक का आधार नंबर, नाम, जन्म तिथि और मृत्यु पंजीकरण संख्या जैसी जानकारी देनी होती है। सत्यापन के बाद यूआईडीएआई आधार नंबर को निष्क्रिय कर देता है।

इस डिजिटल सुविधा से परिवारों को दफ्तरों के चक्कर लगाने से राहत मिलती है।

आधार सुरक्षा के लिए अन्य कदम

आधार के दुरुपयोग को रोकने के लिए यूआईडीएआई ने कई अतिरिक्त सुरक्षा उपाय भी किए हैं। बायोमेट्रिक लॉकिंग से फिंगरप्रिंट और आईरिस डेटा सुरक्षित किया जा सकता है। फेस ऑथेंटिकेशन और लाइवनेस डिटेक्शन जैसी तकनीकें नकली पहचान को रोकने में मदद करती हैं।

सबसे अहम बात यह है कि आधार का मूल बायोमेट्रिक डेटा किसी के साथ साझा नहीं किया जाता।

छोटा कदम, बड़ा असर

किसी प्रियजन की मृत्यु के बाद आधार कार्ड को निष्क्रिय कराना एक छोटा कदम लग सकता है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा है। यह पहचान की सुरक्षा करता है, धोखाधड़ी को रोकता है और भारत की डिजिटल प्रणाली में विश्वास बनाए रखता है।

समय पर की गई यह कार्रवाई न केवल परिवार को संभावित परेशानियों से बचाती है, बल्कि पूरे आधार तंत्र को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाए रखने में भी योगदान देती है।

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