दिल्ली में वायु प्रदूषण की समस्या पर निरंतर निगरानी और नियंत्रण के उद्देश्य से सरकार ने पूरे वर्ष काम करने की रणनीति को आगे बढ़ाते हुए नई पहल की है। इसी क्रम में राजधानी के विभिन्न हिस्सों में छह नए निरंतर परिवेशीय वायु गुणवत्ता मॉनिटरिंग सिस्टम (CAAQMS) शुरू किए गए हैं। इसके साथ ही मोबाइल निगरानी और कार्रवाई के लिए ‘वायु रक्षक’ फ्लीट को भी रवाना किया गया।
नए मॉनिटरिंग सिस्टम दिल्ली के शैक्षणिक, आवासीय और सार्वजनिक क्षेत्रों में लगाए गए हैं, जिनमें जेएनयू, इग्नू, एनएसयूटी (वेस्ट कैंपस), सीडब्ल्यूजी अक्षरधाम क्षेत्र, एसबीवी दिल्ली कैंट और एसपीएम तालकटोरा गार्डन शामिल हैं। इन स्थानों पर स्थापित प्रणालियों के माध्यम से वायु में मौजूद प्रमुख प्रदूषकों की निरंतर और सटीक जानकारी एकत्र की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार, इससे वायु गुणवत्ता के रुझानों को बेहतर ढंग से समझने और समय पर आवश्यक कदम उठाने में मदद मिलेगी।
अब तक प्रदूषण नियंत्रण के प्रयास अक्सर सर्दियों के महीनों में अधिक केंद्रित रहे हैं, जब स्मॉग और खराब हवा की समस्या गंभीर रूप ले लेती है। नई व्यवस्था के तहत पूरे साल डेटा आधारित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है, ताकि प्रदूषण के स्रोतों की पहचान और समाधान किसी एक मौसम तक सीमित न रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि निरंतर निगरानी से यह स्पष्ट हो सकेगा कि अलग-अलग क्षेत्रों में प्रदूषण का स्तर किन कारणों से बदलता है और किन उपायों का वास्तविक असर पड़ रहा है।
‘वायु रक्षक’ फ्लीट का उद्देश्य भी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह फ्लीट अलग-अलग इलाकों में जाकर मौके पर वायु गुणवत्ता की जांच करेगी और नियमों के उल्लंघन की स्थिति में संबंधित एजेंसियों को कार्रवाई के लिए सूचित करेगी। मोबाइल इकाइयों की मदद से निर्माण स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों और यातायात प्रभावित इलाकों की स्थिति पर भी नजर रखी जा सकेगी।
कार्यक्रम के दौरान कैबिनेट के अन्य सदस्य और विभिन्न विभागों के अधिकारी भी मौजूद रहे। इस पहल को लेकर पर्यावरण से जुड़े जानकारों ने इसे तकनीकी रूप से उपयोगी कदम बताया है, हालांकि उनका कहना है कि निगरानी के साथ-साथ दीर्घकालिक नीतिगत बदलाव और सख्त अमल भी जरूरी होंगे। आने वाले समय में यह देखा जाएगा कि नई प्रणालियों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर किस तरह के ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाते हैं और उनका वायु गुणवत्ता पर क्या असर पड़ता है।