होली से पहले रंगभरी एकादशी कब, नोट करें डेट, शिव जी से जुड़ा है पर्व
जागृति सोनी बरसले February 10, 2026 10:42 AM

Rangbhari Ekadashi 2026: हिंदु धर्म में एकादशी महज एक व्रत नहीं बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति और मोक्ष की ओर बढ़ने का मार्ग भी है. एकादशी व्रत विष्णु जी को समर्पित है लेकिन होली से पहले आने वाली एकादशी के दिन खासतौर पर शिव-पार्वती जी की पूजा की जाती है. इसे रंगभरी एकादशी कहा जाता है.

इस साल रंगभरी एकादशी 27 फरवरी 2026 को है. इसे आमलकी एकादशी भी कहते हैं. इस दिन आंवले के वृक्ष की पूजा करना, उसके नीचे भजन-कीर्तन करना और प्रसाद ग्रहण करना अत्यंत शुभ माना जाता है.

रंगभरी एकादशी 2026 मुहूर्त

फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी 27 फरवरी को सुबह 12.33 से शुरू होगी और इस दिन रात को 10 बजकर 32 मिनट पर समाप्त होगी.

  • पूजा मुहूर्त - सुबह 6.48 से सुबह 11.08
  • व्रत पारण समय - सुबह 6.47 - सुबह 09.06 (28 फरवरी 2026)

 
 
 
 
 
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क्यों रंगभरी एकादशी पर होती शिव पूजा

फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष की ग्यारहवीं तिथि वाराणसी के लोगों के लिए विशेष महत्व रखती है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव देवी पार्वती के साथ पहली बार वाराणसी में आए थे. रंगभरी एकादशी को लेकर मान्यता है कि इस दिन जो लोग शिवलिंग पर गुलाल, बेलपत्र और जल अर्पित करते हैं वे गरीबी से मुक्ति पाते हैं और सदा के लिए समृद्धि प्राप्त करते हैं.

काशी में खास होती है रंगभरी एकादशी

वाराणसी में रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव और देवी पार्वती की प्रतिमाओं को मंदिर के पूर्व मुख्य पुजारी काशी विश्वनाथ मंदिर तक लाया जाता है.  यह प्रतीकात्मक यात्रा शिव और पार्वती के अपने भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए शहर में भ्रमण करने का प्रतीक है. ये मूर्तियां गर्भगृह में शिवलिंग के पास स्थापित की जाती हैं, इस शोभायात्रा में पूरा शहर रंगों से सराबोर रहता है.

मां पार्वती की गौना रस्म

रंगभरी एकादशी को बाबा विश्वनाथ और माता गौरा के गौना रस्म के रूप में मनाता है, जहां वाराणसी के प्राचीन गलियों से बाबा विश्वनाथ माता गौरा अपने पूरे परिवार संग पालकी पर सवार होकर गुजरते हैं और इन्हीं गलियों में मौजूद लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपने आराध्य के साथ होली खेलते हैं. 

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