बांग्लादेश में दीपू चंद्र दास की फैमिली को मिलेंगे 25 लाख टका, यूनुस सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान
एबीपी लाइव February 11, 2026 01:12 AM

बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने पिछले साल मयमनसिंह जिले में कट्टरवादी भीड़ के हमले में मारे गए हिंदू अल्पसंख्यक दीपू चंद्र दास के परिवार को 25 लाख टका मुआवजा देने की घोषणा की है. अंतरिम सरकार ने दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या के दो महीने बीत जाने के बाद बांग्लादेश में होने वाले आम चुनाव से सिर्फ दो दिन पहले उसके परिवार को घर बनाने के लिए वित्तीय सहायता देने की घोषणा की है.

सरकार ने कहा कि दीपू दास अपने परिवार में एकमात्र कमाने वाला सदस्य था और सरकार ने दीपू के परिवार को दीर्घकालिक वित्तीय मदद देने का आश्वासन दिया था. ऐसे में सरकार ने परिवार के लिए एक पक्का घर बनाने के लिए वित्तीय मदद के तौर पर 25 लाख टका आवंटिन किए हैं, ताकि उनका भविष्य सुरक्षित हो सके. इसके अलावा, उसके परिवार को नकद आर्थिक मदद भी दी जाएगी. सरकार दीपू दास के पिता और पत्नी को 10 लाख टका देगी. इसके साथ ही उनके बच्चे के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए 5 लाख टका का FDR भी कराया जाएगा.

दीपू दास की हत्या पूरे देश के लिए शर्मनाक: डॉ. अबरार

बांग्लादेश के शिक्षा सलाहकार डॉ. सीआर अबरार ने मंगलवार (10 फरवरी, 2026) को कहा कि दीपू चंद्र दास की हत्या एक जघन्य अपराध है. जिसके लिए समाज में कोई जगह नहीं है. उन्होंने कहा कि सरकार की ओर से परिवार को दी जा रही मदद किसी की जान की भरपाई तो नहीं कर सकती है, लेकिन सरकार इसके लिए न्याय को जरूर सुनिश्चित करेगी.

उन्होंने आगे कहा कि सांप्रदायिक उन्माद के कारण हुई यह हत्या पूरे देश के लिए शर्मनाक है और सिर्फ न्याय ही इस कलंक को दूर कर सकता है.

18 दिसंबर को हुई थी दीपू चंद्र दास की निर्मम हत्या

दीपू चंद्र दास की 18 दिसंबर, 2025 को बांग्लादेश के मयमनसिंह जिले के भालुका उपजिला के स्क्वायर मास्टरबाड़ी इलाके में पीट-पीटकर और पेड़ से लटकाते हुए जलाकर हत्या कर दी गई थी. बांग्लादेश की कट्टरवादी भीड़ ने दीपू पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप लगाते हुए उसे बेरहमी से पीटा और फिर से पेड़ से बांधकर उसे आग लगा दी थी.

दीपू की हत्या ने हिंदुओं की सुरक्षा पर खड़े किए थे सवाल

दीपू की हत्या ने बांग्लादेश में अल्पसंख्यक और हिंदू समुदाय के लोगों के जिंदगी की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे. इस घटना को व्यापक रूप से सांप्रदायिक हिंसा के तौर पर देखा गया था, जिसकी भारत समेत कई देशों ने निंदा भी की थी.

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