उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जिसने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया. यहां एक फौजी के 14 साल के बेटे ने आत्महत्या करने की कोशिश की. गनीमत यह रही कि चाइल्ड केयर सेंटर के कर्मचारियों ने समय रहते दरवाजा तोड़कर उसकी जान बचा ली. घटना शहर कोतवाली क्षेत्र के सीतापुर नेत्र चिकित्सालय परिसर में बने चाइल्ड केयर सेंटर की है. बताया जा रहा है कि नाबालिग पिछले दो दिनों से लापता था. परिजन उसकी तलाश में दर-दर भटक रहे थे, लेकिन कहीं कोई सुराग नहीं मिल रहा था. इसी बीच मंगलवार को सूचना मिली कि नाबालिग चाइल्ड केयर सेंटर में मिला है और उसने वहां फांसी लगाने की कोशिश की है.
खेलने निकला था नाबालिग, फिर अचानक हो गया गायबदरअसल, बारादरी थाना क्षेत्र के हरुनगला गांव के रहने वाले विजेंद्र सिंह फौज में हैं. उनका कहना है कि रविवार शाम उनका 14 साल का बेटा अजय घर से खेलने के लिए निकला था. शुरुआत में किसी को कोई चिंता नहीं हुई, लेकिन देर रात तक जब वह वापस नहीं लौटा तो परिजन परेशान हो गए. आसपास के इलाकों में तलाश की गई, रिश्तेदारों और दोस्तों से पूछताछ की गई, लेकिन बच्चे का कहीं पता नहीं चला.
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आखिरकार मजबूरी में परिवार ने पुलिस में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई. पुलिस भी बच्चे की तलाश में जुट गई. दो दिन बीत जाने के बाद मंगलवार दोपहर पुलिस को जानकारी मिली कि बच्चा शहर कोतवाली क्षेत्र के सीतापुर नेत्र चिकित्सालय परिसर स्थित चाइल्ड केयर सेंटर में है. परिजन वहां पहुंचे तो जो नजारा सामने आया, उसने सभी को सन्न कर दिया. चाइल्ड केयर सेंटर के एक खाली कमरे में बच्चे ने बिजली के तार से फंदा बनाकर फांसी लगाने की कोशिश की थी. उसी वक्त वहां मौजूद स्टाफ की नजर कमरे पर पड़ी. दरवाजा अंदर से बंद था, शक होने पर कर्मचारियों ने दरवाजा तोड़ा और बच्चे को फंदे से नीचे उतारा.
अस्पताल में था भर्ती, कारण बना रहस्यबच्चे की हालत उस वक्त बेहद गंभीर थी. उसे तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसका इलाज शुरू किया. अस्पताल में भर्ती होने के दौरान बच्चा दर्द से कराह रहा था और काफी डरा हुआ नजर आ रहा था. माता-पिता जब अस्पताल पहुंचे तो अपने बेटे की हालत देखकर सदमे में आ गए. डॉक्टरों के अनुसार, समय रहते इलाज मिलने से बच्चे की जान बच गई. दवाइयां देने के बाद हालत में सुधार हुआ, जिसके बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. हालांकि डॉक्टरों ने बच्चे को मानसिक रूप से काफी कमजोर बताया है.
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 14 साल के बच्चे ने इतना बड़ा कदम क्यों उठाया? परिजनों का कहना है कि अजय बिल्कुल सामान्य बच्चा था. घर में किसी तरह का झगड़ा या दबाव भी नहीं था. फिर वह घर से चाइल्ड केयर सेंटर तक कैसे पहुंचा और उसके मन में आत्महत्या का विचार क्यों आया, यह बात किसी की समझ में नहीं आ रही है. बच्चे के रिश्तेदारों ने इस पूरे मामले में साजिश की आशंका भी जताई है. उनका कहना है कि दो दिन तक बच्चा कहां रहा, किसके संपर्क में था, यह सब जांच का विषय है. पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और बच्चे से भी पूछताछ करने की तैयारी की जा रही है.
क्या बोले बिथरी चैनपुर इंस्पेक्टर?वहीं पूरे मामले बिथरी चैनपुर इंस्पेक्टर चंद्र प्रकाश शुक्ला ने बताया कि यह बच्चा रविवार को हमको घूमते हुए मिला था. जब बच्चे से हमने पूछा तुम्हारा नाम क्या है और कहां के रहने वाले हो तो उसने अपना नाम अजय बताया था और कहा कि वह जनपद शाहजहांपुर के निगोही का रहने वाला है. बच्चे ने अपने मां-बाप का नाम और मोबाइल नंबर नहीं बताया, जिसके बाद हमने बच्चे को चाइल्ड केयर के सुपुर्द कर दिया था और निगोही थाने को भी सूचित कर दिया गया था. आज बच्चे के मां-बाप उसे अपने साथ ले गए हैं.