काशी में मनाई जाने वाली अनोखी मसान होली का महत्व
newzfatafat February 11, 2026 08:42 PM

होली का पर्व रंगों का उत्सव माना जाता है, लेकिन वाराणसी में इसे चिता की राख से मनाया जाता है, जिसे मसान होली कहा जाता है। इस वर्ष मसान होली 28 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। वाराणसी में भगवान शिव और देवी पार्वती रंगभरी एकादशी पर रंगों से होली खेलते हैं। इसके अगले दिन, फाल्गुन शुक्ल द्वादशी को भगवान महाश्मशाननाथ अपने भक्तों के साथ राख से होली खेलते हैं, जिसमें भूत, प्रेत, राक्षस, यक्ष और गंधर्व शामिल होते हैं। इस परंपरा का उल्लेख शिव पुराण और दुर्गा सप्तशती में भी मिलता है।


मसान होली का आध्यात्मिक महत्व


मसान होली वाराणसी में मनाई जाने वाली एक विशेष और आध्यात्मिक होली है, जिसे राख का त्योहार भी कहा जाता है। 'मसान' का अर्थ है श्मशान, और इस होली का मतलब है श्मशान में होली। इस अवसर पर न तो रंग होते हैं, न पिचकारियाँ, और न ही कोई ग्वाला या ग्वालिन। भक्त चिता की राख से होली खेलते हैं, जो दुनियावी इच्छाओं से मुक्ति का प्रतीक है। यह त्योहार मृत्यु पर विजय और आत्मा की अमरता का प्रतीक है।


कौन खेल सकता है मसान होली?


मसान होली, जिसे भस्म होली और भभूत होली भी कहा जाता है, काशी के श्मशान घाट में मनाई जाती है। यह त्योहार विश्वभर में प्रसिद्ध है और विदेशों से भी लोग इसे देखने आते हैं। साधु, संत, आम लोग और अघोरी इस होली में भाग लेते हैं, लेकिन महिलाओं को इसमें शामिल होने की अनुमति नहीं होती।


मसान होली की उत्पत्ति


पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने मसान होली की शुरुआत की थी। रंगभरी एकादशी के दिन, बाबा विश्वनाथ देवी पार्वती से विवाह के बाद पहली बार काशी आए थे। उस दिन माता का स्वागत गुलाल से किया गया था, और भगवान शिव ने अपने भक्तों के साथ गुलाल से होली खेली थी। लेकिन भूत, यक्ष, गंधर्व और आत्माओं के साथ नहीं। इसलिए, रंगभरी एकादशी के अगले दिन श्मशान में होली मनाई जाती है।


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