जब पूरी दुनिया मुंह मोड़ ले, तब जो मदद के लिए आगे आए, वही असली 'मसीहा' कहलाता है।
बॉलीवुड के उन सितारों की बात करें जिन्होंने वर्षों तक हमारे चेहरे पर मुस्कान बिखेरी, आज वे खुद मुश्किलों में हैं। चेक बाउंस के मामले में फंसे राजपाल यादव ने आत्मसमर्पण से पहले कहा था, "मेरे पास पैसे नहीं हैं, यहाँ कोई किसी का दोस्त नहीं होता, सब अकेले हैं।"
लेकिन जहां उम्मीद खत्म होती है, वहीं से सोनू सूद की इंसानियत की शुरुआत होती है। सोनू ने न केवल राजपाल को अपनी आगामी फिल्म में शामिल किया, बल्कि पूरी फिल्म इंडस्ट्री को एक नया दृष्टिकोण भी दिया।
सोनू सूद ने कहा, "यह दान नहीं, बल्कि सम्मान है।" उनका मानना है कि कठिन समय किसी की क्षमता के कारण नहीं, बल्कि परिस्थितियों के कारण आता है। यह मदद केवल पैसे नहीं, बल्कि एक कलाकार का आत्म-सम्मान है।
सोनू ने यह साबित कर दिया कि फिल्म उद्योग केवल एक 'इंडस्ट्री' नहीं, बल्कि एक परिवार भी हो सकता है, बशर्ते वहां सोनू जैसे बड़े दिल वाले लोग मौजूद हों।
यह कहानी हमें यह सिखाती है कि समय कभी भी बदल सकता है, लेकिन जो लोग बुरे समय में साथ खड़े होते हैं, वही इतिहास में अमर रहते हैं।