जीभ का रंग बयां करेगा कैसी है आपकी सेहत, इन बिमारियों का हो सकता है संकेत
Newshimachali Hindi February 12, 2026 12:42 PM

White Or Yellow Tongue: जीभ (Tongue) सिर्फ स्वाद नहीं बताती, बीमारियों का भी संकेत देती है. जीभ का रंग और उस पर जमी परत शरीर में पनप रही कई समस्याओं की ओर संकेत करती है. डॉक्टर (Doctor) भी जीभ देखकर ही कई शुरुआती अनुमान लगा लेते हैं.

जीभ हमारे शरीर का अभिन्न अंग है, जो सिर्फ स्वाद का पता लगाने के लिए ही नहीं बल्कि शरीर के अंदर पनप रही बीमारियों का भी संकेत देती है. जीभ का बदलता रंग बुखार (Fever) से लेकर पेट के खराब (Stomach Problems) होने का संकेत देता है, और यही कारण है कि जब भी हम डॉक्टर के पास जाते हैं तो डॉक्टर जीभ की जांच जरूर करता है. अगर सुबह उठते ही आपकी जीभ पर भी सफेद या पीली परत जमी रहती है तो समझ जाएं कि शरीर में 'आम' बढ़ रहा है. जीभ सिर्फ स्वाद नहीं बताती, बीमारियों का भी संकेत देती है.

सुबह उठते ही जीभ पर सफेद या पीली परत क्यों होती है?

यदि जीभ पर सफेद या पीली परत जमती है, तो यह शरीर में 'आम' यानी टॉक्सिन (Toxins) बढ़ने का संकेत है, जो मेटाबॉलिज्म (Metabolism) को धीमा करके पाचन और आंतों को प्रभावित करता है. आयुर्वेद (Ayurveda) में आम को बहुत नुकसानदेह माना जाता है. आम शरीर में तब बढ़ता है जब विषाक्त और विषैले पदार्थ बाहर निकलने की बजाय अंदर ही जमा होने लगते हैं. ऐसा होने पर मेटाबॉलिज्म स्लो पड़ जाता है और खाना पेट में सड़ने लगता है और पेट दर्द (Stomach Pain), कब्ज (Constipation), गैस (Gas), और अन्य पेट और आंत संबंधी रोग होने लगते हैं. इसी का असर मुंह और जीभ पर देखने के लिए मिलता है. यह सिर्फ पेट की प्रॉब्लम नहीं है. आम धीरे-धीरे खून को गंदा करता है और आगे चलकर गठिया, डायबिटीज, हार्ट डिज़ीज़ (Heart Disease) जैसी बड़ी बीमारियों की नींव रख देता है.

शरीर में बढ़ा हुआ 'आम' क्यों है खतरनाक?

आम के बढ़ने से पेट में सूजन, गैस, कब्ज और पाचन रोग उत्पन्न होते हैं. लंबे समय में यह खून को गंदा कर देता है और गठिया, डायबिटीज़ और हृदय रोग जैसी गंभीर बीमारियों की नींव डालता है.

सफेद जीभ से छुटकारा पाने के लिए अपनाएं ये आयुर्वेदिक उपाय (Safed Jeebh Se Chutkara Pane Ke Liye Ayurvedic Upay)

1. इंटरमिटेंट फास्टिंग सबसे प्रभावी तरीका
14-16 घंटे का उपवास पाचन को पूरा आराम देता है, शरीर की सफाई तेज करता है और मेटाबॉलिज्म को रीसेट करता है.

2. जीरा, धनिया और सौंफ का काढ़ा शरीर से टॉक्सिन निकालता है
दिनभर में इस काढ़े को घूंट-घूंट पीने से ब्लॉकेज (Blockage) खुलते हैं और जमा गंदगी धीरे-धीरे बाहर निकलती है.

3. अग्निसार क्रिया शरीर से 'आम' बाहर निकालने में मिलती है मदद
खाली पेट की जाने वाली यह क्रिया पेट की अग्नि को सक्रिय करके पाचन और डिटॉक्स प्रोसेस को मजबूत बनाती है.

किन बातों से बचना चाहिए?

दिनभर ठंडा पानी पीने से टॉक्सिन जमा होने की संभावना बढ़ती है और कब्ज की समस्या भी बुरी हो सकती है. इसके बजाय हल्का गुनगुना पानी पीना सबसे बेहतर है.

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