आत्मबोध, विश्वबोध और भारत बोध के साथ 'शत्रु बोध' भी होना चाहिए- मनोज कुमार
Tarunmitra February 12, 2026 11:43 AM

जयपुर ।अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जयपुर की ओर से परिषद के प्रतिष्ठित साहित्यिकउपक्रम "साहित्य परिक्रमा" के नव विशेषांक 'आत्म बोध से विश्वबोध' पर केंद्रित परिचर्चा का आयोजन जयपुर एयरपोर्ट के पास स्थित थ्योरी लाइफ कैफे में किया गया। इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के अखिल भारतीय संगठन मंत्री मनोज कुमार रहे। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा कि आत्म बोध से विश्वबोध की महान यात्रा के बीच महत्वपूर्ण पड़ाव 'भारतबोध' है। उन्होंने कहा कि वस्तुत: यह भारत बोध ही हमारे सनातन का दायित्व बोध है।

भारतीय जीवन मूल्यों और परम्पराओं पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि सदियों से हमारे यहां साहित्य संवाद की परम्परा के केंद्र मेले रहे हैं। हाल ही में केरल में माघ कुंभ मेले की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि औपनिवेशिक काल में भारत विरोधी शक्तियों ने इन मेलों का उन्मूलन करके हमारी शाश्वत परम्पराओं पर कुठाराघात किया और भारत की चेतना को कुचलने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि केरल में आयोजित कुंभ मेला भारत की चेतना का साक्षात प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि हमारा दायित्व है कि हम अपनी गौरवशाली परंपराओं को फिर से प्रचलन में लाएं। मनोज कुमार ने कहा कि विश्व कल्याण के लिए भारत का सशक्त होना आवश्यक है। डॉलर के घटते महत्व पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय यूपीआई विश्व की तेजी से लोकप्रिय हो रही लेन-देन पद्धति है। मनोज कुमार ने राष्ट्र विरोधी तत्वों पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ अराष्ट्रीय तत्व भारतीयता को खंडित करने का दुस्साहस कर रहे हैं इसलिए हमें ’शत्रुबोध’ भी होना चाहिए। इस परिचर्चा में प्रदेश भर के कई गणमान्य विद्वानों ने पत्रिका में प्रकाशित 36 विभिन्न आलेखों पर अपने विचार प्रकट किये। इससे पहले इस परिचर्चा की प्रस्तावना विकास तिवारी ने रखी। वहीं परिचर्चा का संचालन साहित्य परिक्रमा पत्रिका के संपादक डॉ. इंदुशेखर ‘तत्पुरुष’ ने किया। इस दौरान भारतीय राजस्व सेवा के अधिकारी व डीडी राजस्थान के संपादक मुरारी गुप्ता सहित कई लेखक,साहित्यकार और परिषद के क्षेत्रीय संगठन मंत्री विपिन चंद्र पाठक और अध्यक्ष अनाराम भी उपस्थित रहे।

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