डायबिटीज: साइलेंट हार्ट अटैक का प्रमुख कारण
Gyanhigyan February 12, 2026 09:43 PM
भोपाल में डॉक्टरों का चौंकाने वाला खुलासा

हाल ही में भोपाल, मध्य प्रदेश में आयोजित एक मेडिकल सेमिनार में चिकित्सकों ने एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि मधुमेह (डायबिटीज) अब साइलेंट हार्ट अटैक का सबसे बड़ा कारण बन गया है।


साइलेंट हार्ट अटैक क्या है?

साइलेंट हार्ट अटैक वह स्थिति है जिसमें दिल का दौरा पड़ता है, लेकिन इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते। मरीज को सीने में दर्द, सांस फूलने या अन्य सामान्य संकेतों का अनुभव नहीं होता। ऐसे में व्यक्ति सामान्य गतिविधियों को जारी रखता है, जबकि दिल की मांसपेशियां धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त होती जाती हैं। इसे 'साइलेंट किलर' कहा जाता है क्योंकि यह बिना किसी चेतावनी के जानलेवा हो सकता है।


डायबिटीज का साइलेंट अटैक से संबंध

डॉक्टरों के अनुसार, डायबिटीज निम्नलिखित कारणों से साइलेंट हार्ट अटैक का प्रमुख कारण है:



  • डायबिटीज के कारण दिल की बड़ी नसों (कोरोनरी आर्टरीज़) में तेजी से ब्लॉकेज होता है।

  • उच्च रक्त शर्करा लंबे समय तक नसों को नुकसान पहुंचाती है, जिससे कम उम्र में हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है।

  • डायबिटीज के मरीजों में लक्षण अक्सर छिपे रहते हैं, जैसे थकान, सांस की तकलीफ या हल्का दर्द, जिन्हें सामान्य समझा जाता है।

  • डॉक्टरों ने बताया कि अब युवाओं में भी साइलेंट अटैक के मामले बढ़ रहे हैं, विशेषकर अनियंत्रित डायबिटीज वाले लोगों में। रात में ब्रेन स्ट्रोक और सुबह हार्ट अटैक के मामले अधिक देखे जा रहे हैं।


अन्य जोखिम कारक

डॉक्टरों के अनुसार, डायबिटीज के अलावा निम्नलिखित कारक भी साइलेंट अटैक को बढ़ावा देते हैं:



  • उच्च रक्तचाप

  • उच्च कोलेस्ट्रॉल

  • तनाव और अनियमित जीवनशैली

  • धूम्रपान या तंबाकू का सेवन

  • मोटापा और कम शारीरिक गतिविधि


बचाव के उपाय

साइलेंट हार्ट अटैक से बचने के लिए निम्नलिखित उपाय करें:



  • नियमित रूप से रक्त शर्करा, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल की जांच करवाएं।

  • यदि आपको डायबिटीज है, तो उसे सख्ती से नियंत्रित करें (दवाएं, आहार, व्यायाम)।

  • स्वस्थ आहार लें: कम तेल-चीनी, अधिक फल-सब्जियां।

  • रोजाना 30-45 मिनट व्यायाम करें।

  • 40 वर्ष से अधिक उम्र के हैं तो नियमित ECG या हार्ट चेकअप करवाएं।

  • यदि असामान्य थकान, सांस फूलना, या मतली जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


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