भारतीय रेलवे ने केंद्रीय बजट 2026 में घोषित डानकुनि–सूरत डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) को तेज़ी से लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को इस महत्वपूर्ण परियोजना को तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए हैं. यह नया डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लगभग 2,100 किलोमीटर लंबा होगा.
यह डानकुनि से सूरत तक पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर गुजरेगा. इससे पूर्वी और पश्चिमी भारत के बीच माल ढुलाई तेज और आसान होगी. मालगाड़ियों का समय बचेगा और मौजूदा रेल मार्गों पर भी भीड़ कम होगी.
रेलवे बोर्ड ने अधिकारियों को दिए ये निर्देश
रेलवे बोर्ड ने डीएफसीसीआईएल (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) के अधिकारियों को मॉडर्न तकनीक के अनुसार बेहतर तकनीकी मानक तय करने के निर्देश दिए हैं. इसमें हाई कैपेसिटी की बिजली व्यवस्था, बिना किसी लेवल क्रॉसिंग के ट्रैक और ‘कवच’ जैसी आधुनिक सिग्नलिंग प्रणाली शामिल करने पर विचार किया जा रहा है, ताकि सुरक्षा बढ़े और अधिक माल ढुलाई हो सके.
एक साथ काम शुरू हो, इसलिए परियोजना को कई हिस्सों में बांटा जाएगा
रेलवे की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को नए खर्च और नई समय-सीमा के अनुसार अपडेट किया जाएगा. इससे योजना और बजट बेहतर तरीके से तैयार किए जा सकेंगे और काम समय पर पूरा होगा. परियोजना को अलग-अलग हिस्सों में बांटा जाएगा ताकि कई जगहों पर एक साथ काम शुरू किया जा सके. हर हिस्से के लिए अलग टीम बनाई जाएगी जो मौके पर रहकर काम की निगरानी करेगी.
रेलवे बोर्ड ने कहा है कि निर्माण शुरू होने से पहले की सभी तैयारियां तेजी से पूरी की जाएं. साथ ही, ठेके से जुड़े दस्तावेज भी पहले से तैयार किए जाएं ताकि काम शुरू करने में कोई देरी न हो. रेलवे ने ये भी कहा है कि इस परियोजना के लिए कितने कर्मचारियों की ज़रूरत होगी, इसका आकलन भी किया जा रहा है. रेलवे बोर्ड को हर हफ्ते प्रगति की जानकारी दी जाएगी, ताकि काम में किसी तरह की रुकावट न आए और परियोजना जल्दी पूरी हो सके.