लालढांग–चिल्लरखाल रोड के बनने का रास्ता साफ, अनिल बलूनी ने Supreme Court और बांसुरी स्वराज का जताया आभार
Indias News Hindi February 13, 2026 09:42 AM

New Delhi, 12 फरवरी . उत्तराखंड सांसद अनिल बलूनी के इंटरवेंशन एप्लीकेशन को Supreme Court ने स्वीकार कर लिया है और 2023 से लगा स्टे ऑर्डर हटा दिया है. इससे लालढांग–चिल्लरखाल रोड के बनने का रास्ता साफ हो गया है.

सांसद अनिल बलूनी ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि यह गढ़वाल समेत पूरे उत्तराखंड के लिए प्रसन्नता का पल है. गढ़वाल के लोग इस रास्ते का इस्तेमाल करते थे, लेकिन यह बंद पड़ा हुआ था. लोगों ने Supreme Court में पिटीशन दायर की हुई थी. हमारी तरफ से सांसद और वकील बांसुरी स्वराज पेश हुई थीं.

उन्होंने कहा कि हम लोगों ने मांग की थी कि हमारी लाइफलाइन, इस रास्ते को खोला जाए. Supreme Court ने हमारे पक्ष में फैसला लिया है. हम इसके लिए आभार व्यक्त करते हैं. इस रास्ते के खुलने से लोगों को सहूलियत होगी. उत्तराखंड के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाने के लिए उत्तर प्रदेश से होकर जाना पड़ता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.

वहीं, सांसद और वकील बांसुरी स्वराज ने कहा कि 2023 के जनवरी में Supreme Court ने लालढांग–चिल्लरखाल रोड पर स्टे लगाया था. सांसद अनिल बलूनी ने स्थानीय लोगों के हित के लिए Supreme Court में याचिका लगाई और निवेदन किया कि इस सड़क का निर्माण होना चाहिए और इससे किसी भी तरह से पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचाया जाना चाहिए.

उन्होंने बताया कि यह सड़क एक जीवनरेखा के रूप में काम करती है. गढ़वाल के अनगिनत गांव इससे जुड़े हुए हैं और हजारों लोगों पर इसका सीधा असर पड़ता है. Supreme Court ने इसका संज्ञान लिया और उत्तराखंड को इस सड़क के निर्माण की अनुमति दी है.

अनिल बलूनी ने social media प्लेटफॉर्म एक्स पर इससे संबंधित एक पोस्ट लिखकर बताया कि राजाजी नेशनल पार्क से जुड़े लालढांग–चिल्लरखाल रोड प्रोजेक्ट को लेकर Thursday को उच्चतम न्यायालय ने मेरे इंटरवेंशन एप्लीकेशन को स्वीकार करते हुए 2023 से लगा स्टे ऑर्डर हटा दिया है. यह फैसला कोटद्वार एवं आसपास के क्षेत्र की जनता के लिए बड़ी राहत लेकर आया है.

उन्होंने आगे लिखा कि उच्चतम न्यायालय में गढ़वाल की जनता का पक्ष रखने के लिए Supreme Court की वरिष्ठ अधिवक्ता एवं New Delhi से सांसद बांसुरी स्वराज, अधिवक्ता सिद्धार्थ यादव और अधिवक्ता वैभव थलेडी का हार्दिक धन्यवाद.

एएमटी/डीकेपी

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