संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में मानी जाती है, जहां सफलता हासिल करने के लिए वर्षों की मेहनत, धैर्य और मजबूत इरादों की जरूरत होती है. पानीपत की रहने वाली कीर्ति ने इसी हौसले और लगन के दम पर यूपीएससी परीक्षा 2025 में 304वीं रैंक हासिल कर अपनी सफलता की कहानी लिख दी है. कीर्ति की इस उपलब्धि से न केवल उनके परिवार में बल्कि पूरे जिले में खुशी का माहौल है और लोग उनकी सफलता पर गर्व महसूस कर रहे हैं.
कीर्ति ने यह मुकाम अपने चौथे प्रयास में हासिल किया है. उन्होंने बताया कि पहले के प्रयासों में जब उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा तो वह काफी निराश हो गई थीं. हालांकि यूपीएससी पास करने का उनका सपना अडिग रहा. उन्होंने अपनी निराशा को ही अपनी ताकत बनाया और पहले से ज्यादा मेहनत के साथ तैयारी में जुट गईं. लगातार प्रयास और दृढ़ संकल्प का ही परिणाम है कि चौथे प्रयास में उन्होंने यह प्रतिष्ठित परीक्षा पास कर ली.
कीर्ति ऐसे परिवार से ताल्लुक रखती हैं जहां शिक्षा और सेवा का माहौल पहले से मौजूद है. उनके पिता जोगिंद्र सिंह रिटायर्ड प्रोफेसर हैं. उनकी माता मंजू रानी काबड़ी गांव के सरकारी स्कूल में हिंदी की अध्यापिका हैं.
कीर्ति के परिवार के अन्य सदस्य भी विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. उनके भाई आशीष गृह मंत्रालय में बतौर डीएसपी तैनात हैं. वहीं उनकी भाभी मुनमुन चौधरी गुरुग्राम में जज के पद पर कार्यरत हैं. उनकी छोटी बहन सुकीर्ति कुरुक्षेत्र के आदेश मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं.
कीर्ति पिछले दो वर्षों से पावरग्रिड में लीगल ऑफिसर के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं. इसके बावजूद उनका लक्ष्य हमेशा भारतीय प्रशासनिक सेवा का हिस्सा बनना रहा. इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने अपनी नौकरी के साथ-साथ यूपीएससी की तैयारी भी जारी रखी और आखिरकार सफलता हासिल की.
अपनी सफलता का श्रेय कीर्ति ने अपने माता-पिता को दिया है. उन्होंने बताया कि जब भी उन्हें असफलता मिली, उस समय माता-पिता ने उनका हौसला बढ़ाया और उन्हें टूटने नहीं दिया. परिवार के भरोसे और समर्थन ने ही उन्हें आगे बढ़ने की ताकत दी.
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कीर्ति का कहना है कि रैंक हासिल करना उनके सफर की केवल शुरुआत है. उनका असली लक्ष्य जनसेवा करना है. वह चाहती हैं कि अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए राष्ट्र के विकास में योगदान दें और समाज के वंचित वर्गों की मदद कर सकें. कीर्ति की इस सफलता ने यह साबित कर दिया कि अगर हौसला मजबूत हो और परिवार का साथ मिले तो असफलताएं भी सफलता की सीढ़ी बन जाती हैं.
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