दुनिया इस वक्त एक बड़े भू-राजनीतिक संकट के मुहाने पर खड़ी है। एक तरफ जहां अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है, वहीं दूसरी तरफ ड्रैगन यानी चीन खामोशी से अपनी एक अलग ‘गोल्डन चाल’ चल रहा है। युद्ध की आहट और वैश्विक अनिश्चितता के बीच, चीन जिस रफ्तार से सोना खरीद रहा है, उसने पूरी दुनिया के होश उड़ा दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें $5,000 प्रति औंस के जादुई आंकड़े को पार कर चुकी हैं। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था आखिर इतनी जल्दबाजी में अपना स्वर्ण भंडार क्यों भर रही है और इसका वैश्विक बाजार पर क्या असर होगा।
क्या है ड्रैगन का असली मास्टरप्लान?चीन के केंद्रीय बैंक ‘पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना’ (PBOC) ने फरवरी महीने में भी सोने की अपनी ताबड़तोड़ खरीदारी जारी रखी है। यह लगातार 16वां महीना है जब चीन ने अपने खजाने में सोने का इजाफा किया है। ताजा आंकड़ों पर नजर डालें तो फरवरी में PBOC ने 30,000 ट्रॉय औंस सोना खरीदा, जिसके बाद उसका कुल स्वर्ण भंडार बढ़कर 74.22 मिलियन औंस तक पहुंच गया है। जनवरी में यह आंकड़ा 74.19 मिलियन औंस था।
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन का यह कदम महज एक साधारण निवेश नहीं है, बल्कि एक गहरी रणनीतिक चाल है। साल 2024 के अंत से ही चीन डॉलर पर अपनी निर्भरता कम करने यानी ‘डी-डॉलराइजेशन’ की दिशा में आक्रामक तरीके से काम कर रहा है। अपनी अर्थव्यवस्था को विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव और अमेरिकी प्रतिबंधों के जोखिम से बचाने के लिए वह अब डॉलर के बजाय सोने पर सबसे ज्यादा भरोसा जता रहा है।
$5000 के पार क्यों निकली सोने की चमक?अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमतें थमने का नाम नहीं ले रही हैं। अमेरिका और इजरायल की ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद निवेशकों में डर और अनिश्चितता का माहौल है। इतिहास गवाह है कि जब भी वैश्विक सुरक्षा दांव पर होती है, निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों से अपना पैसा निकालकर सोने जैसे ‘सेफ-हेवन’ (सुरक्षित निवेश) की तरफ भागते हैं।
यही वजह है कि ‘स्पॉट गोल्ड’ 1.85% की भारी उछाल के साथ $5,171 प्रति औंस के पार निकल गया है। आम निवेशकों और बड़े संस्थानों का रुझान भी बिल्कुल केंद्रीय बैंकों जैसा ही नजर आ रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सिर्फ फरवरी महीने में ही यूएस-लिस्टेड गोल्ड ईटीएफ (ETF) में $4.5 बिलियन का भारी-भरकम निवेश आया है।
दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों में मची खलबलीजहां एक तरफ चीन और पूर्वी एशियाई देश सोना जमा करने की होड़ में लगे हैं, वहीं दुनिया के बाकी देशों के केंद्रीय बैंकों की रणनीति इस वक्त बंटी हुई नजर आ रही है। पोलैंड का केंद्रीय बैंक, जो कुछ समय पहले तक दुनिया का सबसे बड़ा खरीदार था, अब अपनी घरेलू रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने रिजर्व का कुछ हिस्सा बेचने का मन बना रहा है।
दूसरी ओर, कड़े प्रतिबंधों और आर्थिक अलगाव का सामना कर रहे रूस और वेनेजुएला जैसे देश अपनी नकदी की कमी को दूर करने के लिए अपना सोना बाजार में बेच रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की विश्लेषक मारिसा सलीम का कहना है कि कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव के कारण कुछ केंद्रीय बैंकों ने भले ही फिलहाल खरीदारी रोक दी हो, लेकिन भू-राजनीतिक जोखिम कम होने के आसार नहीं दिख रहे हैं, इसलिए बाजार में सोने की मांग मजबूती से बनी रहेगी।
क्या अब और आसमान छुएंगे सोने के दाम?इन वैश्विक घटनाक्रमों का सीधा असर आम आदमी की जेब और उसके भविष्य के निवेश पर पड़ता है। जेपी मॉर्गन (J.P. Morgan) के विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की औसत कीमत $5,055 प्रति औंस के आसपास बनी रह सकती है। इसका सीधा मतलब यह है कि केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग के कारण सोने की कीमतों में किसी बड़ी गिरावट की उम्मीद फिलहाल कम ही है। अमेरिकी मौद्रिक नीति में बदलाव के कारण बाजार में थोड़े समय के लिए अस्थिरता आ सकती है, लेकिन लंबी अवधि में सोना एक सबसे मजबूत और सुरक्षित निवेश विकल्प बना रहेगा।