अर्थ है- 'माता और जन्मभूमि (मातृभूमि) स्वर्ग से भी श्रेष्ठ/महान हैं'

स्त्रीं तु रोचमनायन सर्वं तद्रोचते कुलम्।
तस्यां त्वरोचमनायां सर्वमेव न रोचते॥ (मनुस्मृति 3.62 )
अर्थ- परिवार की खुशी महिला की खुशी पर निर्भर करती है. जब वह खुश होती है, तो परिवार फलता-फूलता है; जब वह खुश नहीं होती, तो सभी को इसका असर महसूस होता है.
तेजोमंदिता उजियाला भवाम्यहं शक्तिः शिवालिका। (नवयुगजनिता 3)
अर्थ- तेज से सुशोभित और जगमगाता, मैं शक्ति हूं.
नार्यस्तु राष्ट्रस्य स्वः।
अर्थ- नारी राष्ट्र का भविष्य है.
अतुलं तत्र तत्तेजः सर्वदेवशरीरजम्।
एकस्थं तद्भुन्नरी समृद्धिलोकत्रयं त्वविशा॥ (देवीमहात्म्यम 2.13)
अर्थ- सभी देवताओं की उत्पत्ति हुई और त्रिलोक में व्याप्त
वह अतुल्य तेज हुआ जब संयोजन तब वह नारी बनी.