बिहार में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने की संभावना बढ़ रही है। नीतीश कुमार का 20 साल का शासन अब समाप्त होने जा रहा है। यह दिलचस्प है कि बिहार और ओडिशा कभी बंगाल का हिस्सा रहे थे। अब भाजपा की नजर बंगाल पर है, और वह चुनाव की तैयारी कर रही है।
भाजपा ने बिहार में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है, और अब पश्चिम बंगाल की बारी है। उत्तर, पश्चिम और पूर्वी भारत के तीन बड़े राज्यों में भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं था। हाल ही में ओडिशा में भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की, जिससे नवीन पटनायक का 25 साल का शासन समाप्त हुआ। अब बिहार में भी भाजपा की सरकार बनने की संभावना है।
पश्चिम बंगाल में चुनाव केवल भाजपा के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय और आंतरिक सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है। पिछले चुनाव में भाजपा को 40% वोट मिले थे, लेकिन चुनाव परिणामों के बाद राज्य में हिंसा हुई। भाजपा समर्थक हिंदुओं को निशाना बनाया गया, जिससे उनकी सुरक्षा की चिंता बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव उनके और उनकी पार्टी के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है। अगर उनकी पार्टी हारती है, तो इसका परिणाम वामपंथी मोर्चे की तरह हो सकता है। ममता बनर्जी को यह भी चिंता है कि मतदाता सूची में नामों की कटौती चुनाव को प्रभावित कर सकती है।
पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के कारण चुनावी प्रक्रिया में बाधा आ रही है। चुनाव आयोग ने राज्य सरकार के प्रयासों को विफल कर दिया है। अगर चुनाव टलते हैं, तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू हो सकता है, जिससे ममता बनर्जी की स्थिति और कमजोर हो जाएगी।
पश्चिम बंगाल की सीमा बांग्लादेश से लगती है, और घुसपैठ और तस्करी की समस्या बढ़ रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में सीमांचल का दौरा किया, जिससे यह संकेत मिलता है कि केंद्र सरकार इस क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर है।