भारत में टेलीविजन मीडिया की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है। ऐसा लगता है कि दुनिया के किसी अन्य देश में मीडिया इस तरह की गैरजिम्मेदारी नहीं दिखाता। यहां के हर चैनल को युद्ध के मैदान में बदल दिया गया है। चैनलों पर युद्ध के सायरन बजते हैं और विशेषज्ञों के नाम पर ऐसे लोग बुलाए जाते हैं जो युद्धोन्माद फैलाते हैं। ये लोग ऐसी बातें करते हैं जो केवल तनाव बढ़ाती हैं।
खबरों के नाम पर चैनल लगातार झूठी जानकारियाँ प्रसारित करते हैं, जिससे कभी-कभी सरकार को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसी कारण केंद्र सरकार ने बार्क से अनुरोध किया है कि वह एक महीने तक टीआरपी जारी न करे। टीआरपी का मतलब टेलीविजन रेटिंग प्वाइंट है, और चैनलों के बीच नंबर वन बनने की होड़ में वे किसी भी तरह की सामग्री दिखाते हैं।
इस एक महीने की अवधि में, सरकार को उम्मीद है कि चैनल अधिक जिम्मेदार बनेंगे और अनावश्यक सामग्री का प्रसारण बंद करेंगे। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमित संघर्ष के दौरान भी चैनलों ने इसी तरह की गैरजिम्मेदार रिपोर्टिंग की थी, जिससे कई बार गलत सूचनाएँ फैलीं।