महिलाओं के लिए हड्डियों की सेहत: जानें साइलेंट बोन लॉस के बारे में
newzfatafat March 08, 2026 12:43 PM

नई दिल्ली: हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जो महिलाओं की उपलब्धियों और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए समर्पित है। अक्सर महिलाएं अपने परिवार की सेहत का ध्यान रखती हैं, लेकिन अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। इस कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं समय पर सामने नहीं आ पातीं।


विशेषज्ञों के अनुसार, 30 वर्ष की आयु के बाद कई महिलाओं में हड्डियों की मजबूती में कमी आने लगती है। इसे साइलेंट बोन लॉस कहा जाता है, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकता है।


महिलाओं में साइलेंट बोन लॉस क्या है?

डॉक्टरों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में हड्डियों की घनत्व में कमी आने लगती है, जिसे ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। इसे साइलेंट बीमारी भी कहा जाता है क्योंकि इसके प्रारंभिक लक्षण स्पष्ट नहीं होते। कई बार महिलाओं को इस समस्या का पता तब चलता है जब अचानक फ्रैक्चर हो जाता है या हड्डियां बहुत कमजोर हो जाती हैं। इसलिए समय पर हड्डियों की देखभाल करना अत्यंत आवश्यक है।


30 की उम्र के बाद हड्डियों की कमजोरी के कारण

महिलाओं में 30 वर्ष की आयु के बाद कई हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिनमें एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर महत्वपूर्ण होता है। जब इस हार्मोन का स्तर घटता है, तो हड्डियों की मजबूती भी कम होने लगती है। इसके अलावा, कुछ जीवनशैली से जुड़े कारण भी हड्डियों की कमजोरी को बढ़ा सकते हैं, जैसे:



  • कैल्शियम और विटामिन डी की कमी

  • लंबे समय तक बैठे रहना और कम शारीरिक गतिविधि

  • धूम्रपान और अधिक शराब का सेवन

  • परिवार में हड्डियों की बीमारी का इतिहास

  • बहुत कम बॉडी वेट


ये सभी कारण धीरे-धीरे हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं।


समय पर हड्डियों की जांच कराना आवश्यक

डॉक्टरों का कहना है कि हड्डियों की स्थिति के बारे में सही जानकारी के लिए समय-समय पर जांच कराना आवश्यक है। DEXA स्कैन एक ऐसा परीक्षण है, जिससे हड्डियों की घनत्व का पता लगाया जा सकता है। इस जांच से शुरुआती स्तर पर ही हड्डियों की कमजोरी का पता चल जाता है और समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है।



  • कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर आहार लें: हड्डियों को मजबूत रखने के लिए कैल्शियम और विटामिन डी आवश्यक हैं। अपनी डाइट में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां, नट्स और फोर्टिफाइड फूड शामिल करें।

  • नियमित एक्सरसाइज करें: रोजाना हल्की एक्सरसाइज, वॉक, योग या जॉगिंग करने से हड्डियों की ताकत बढ़ती है। वेट बेयरिंग एक्सरसाइज भी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करती हैं।

  • शराब और कैफीन का सेवन सीमित रखें: बहुत ज्यादा शराब और कैफीन लेने से शरीर में कैल्शियम के अवशोषण पर असर पड़ सकता है। इसलिए इनका सेवन सीमित मात्रा में करना बेहतर होता है।

  • धूम्रपान से दूरी बनाएं: स्मोकिंग हड्डियों को धीरे-धीरे कमजोर कर सकती है। इससे ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा भी बढ़ जाता है। इसलिए धूम्रपान से दूर रहना जरूरी है।

  • तनाव को कम रखें: लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी शरीर की सेहत पर असर डाल सकता है। योग, मेडिटेशन और माइंडफुलनेस जैसी आदतें अपनाकर तनाव को नियंत्रित किया जा सकता है।


© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.