नई दिल्ली: हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है, जो महिलाओं की उपलब्धियों और उनके योगदान को मान्यता देने के लिए समर्पित है। अक्सर महिलाएं अपने परिवार की सेहत का ध्यान रखती हैं, लेकिन अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। इस कारण कई स्वास्थ्य समस्याएं समय पर सामने नहीं आ पातीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, 30 वर्ष की आयु के बाद कई महिलाओं में हड्डियों की मजबूती में कमी आने लगती है। इसे साइलेंट बोन लॉस कहा जाता है, जो आगे चलकर गंभीर समस्या बन सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, उम्र बढ़ने के साथ महिलाओं में हड्डियों की घनत्व में कमी आने लगती है, जिसे ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है। इसे साइलेंट बीमारी भी कहा जाता है क्योंकि इसके प्रारंभिक लक्षण स्पष्ट नहीं होते। कई बार महिलाओं को इस समस्या का पता तब चलता है जब अचानक फ्रैक्चर हो जाता है या हड्डियां बहुत कमजोर हो जाती हैं। इसलिए समय पर हड्डियों की देखभाल करना अत्यंत आवश्यक है।
महिलाओं में 30 वर्ष की आयु के बाद कई हार्मोनल परिवर्तन होते हैं, जिनमें एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर महत्वपूर्ण होता है। जब इस हार्मोन का स्तर घटता है, तो हड्डियों की मजबूती भी कम होने लगती है। इसके अलावा, कुछ जीवनशैली से जुड़े कारण भी हड्डियों की कमजोरी को बढ़ा सकते हैं, जैसे:
ये सभी कारण धीरे-धीरे हड्डियों को कमजोर कर सकते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि हड्डियों की स्थिति के बारे में सही जानकारी के लिए समय-समय पर जांच कराना आवश्यक है। DEXA स्कैन एक ऐसा परीक्षण है, जिससे हड्डियों की घनत्व का पता लगाया जा सकता है। इस जांच से शुरुआती स्तर पर ही हड्डियों की कमजोरी का पता चल जाता है और समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है।