कुवैत के फैसले से पाकिस्तान की बढ़ी टेंशन! ऐसा क्या हुआ कि परेशान हो गए शहबाज?
एबीपी लाइव March 08, 2026 03:42 PM

मिडिल ईस्ट में बढ़ता युद्ध अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर भी असर डालने लगा है. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच जारी संघर्ष के बीच कई तेल उत्पादक देश उत्पादन और निर्यात को लेकर बड़े फैसले ले रहे हैं. इन फैसलों से दुनिया भर में तेल और गैस की सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है.

हाल ही में कतर ने LNG के निर्यात को लेकर अहम फैसला लिया था. अब कुवैत ने भी तेल उत्पादन घटाने का ऐलान कर दिया है. कुवैत की सरकारी कंपनी Kuwait Petroleum Corporation (KPC) ने 7 मार्च को जारी बयान में कहा कि क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा खतरों के कारण यह फैसला जोखिम प्रबंधन और व्यापार रणनीति के तहत लिया गया है. हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया कि उत्पादन में कितनी कटौती की जाएगी.

 कुवैत की सरकारी कंपनी का फैसला

ब्लूमर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक कुवैत की सरकारी कंपनी ने कहा कि Strait of Hormuz में बढ़ते खतरे के कारण जहाजों की आवाजाही जोखिम भरी हो गई है. इसी वजह से एहतियात के तौर पर तेल उत्पादन कम करने का निर्णय लिया गया है. कुवैत का कहना है कि अगर क्षेत्रीय हालात सामान्य होते हैं तो इस फैसले की फिर से समीक्षा की जाएगी और उत्पादन बढ़ाया जा सकता है. कुवैत दुनिया के बड़े तेल उत्पादक देशों में शामिल है. फरवरी में उसने प्रतिदिन लगभग 26 लाख बैरल तेल का उत्पादन किया था. ऐसे में उसके उत्पादन में किसी भी बदलाव का असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है. रिपोर्ट्स के मुताबिक खाड़ी क्षेत्र के कई देशों में उत्पादन और निर्यात पर असर पड़ा है. इराक के तेल क्षेत्रों में भी उत्पादन में गिरावट आई है और यह रोजाना लगभग 15 लाख बैरल तक कम हो चुका है. जहाजरानी के जोखिम बढ़ने के कारण निर्यात मार्गों और भंडारण सुविधाओं पर दबाव बढ़ गया है.

संयुक्त अरब अमीरात के लिए टेंशन

इस बीच संयुक्त अरब अमीरात को लेकर भी अनुमान लगाए जा रहे हैं कि अगर समुद्री रास्तों में बाधा बनी रहती है तो वह भी उत्पादन कम करने वाला अगला बड़ा देश हो सकता है. दरअसल ईरान और ओमान के बीच स्थित होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है. यहां से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है. इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ता है. इस पूरे संकट का सबसे ज्यादा असर पाकिस्तान पर पड़ता दिखाई दे रहा है. पाकिस्तान पहले से ही ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है.

रिपोर्टों के मुताबिक देश के पास कच्चे तेल और गैस का सीमित भंडार ही बचा है. स्थिति इसलिए और गंभीर हो गई है क्योंकि हाल ही में कतर ने पाकिस्तान को नोटिस भेजकर LNG सप्लाई रोकने की चेतावनी दी है. पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्री अली परवेज मलिक ने कहा कि अगर कतर की सप्लाई बंद होती है तो देश में ऊर्जा संकट और गहरा सकता है, क्योंकि पाकिस्तान की करीब 99 प्रतिशत LNG जरूरत कतर से पूरी होती है.

पाकिस्तान में कहां से आता है तेल?

कुवैत का तेल उत्पादन घटाने का फैसला भी पाकिस्तान के लिए नई चुनौती बन सकता है. पाकिस्तान अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है और कुवैत उसके प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल है. आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान कुवैत से हर दिन लगभग 40 हजार से 60 हजार बैरल तक पेट्रोलियम उत्पाद और कच्चा तेल आयात करता है.

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