बिहार की राजधानी पटना में लोगों जल्द ही वाटर मेट्रो की सौगात मिलने वाली है. पटना के गांधी घाट पर चार्जिंग प्वाइंट के निर्माण का काम अभी शुरू हुआ है. कंगन घाट और दीघा घाट पर भी इसका निर्माण होना प्रस्तावित है. शनिवार को पर्यटन विभाग की तरफ से इसकी जानकारी दी गई. वाटर मेट्रो का यह सफर 10.5 किमी लंबा होगा. प्रथम चरण में गांधी घाट और गायघाट पर मुख्य पड़ाव होंगे. इसके बाद दूसरे चरण में हाजीपुर, सोनपुर में भी वाटर मेट्रो चलने की योजना है.
पर्यटकों को लुभाने के लिए यहां कई तरह की सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी. दो पर्यावरण अनुकूल वाटर मेट्रो हाइब्रिड मोड में चलाई जाएंगी. आपातकालीन स्थिति के लिए 3-4 रेस्क्यू बोट भी तैनात रहेंगी. इन जहाजों में नई तकनीक की बैट्री का इस्तेमाल किया जाएगा. इसके अलावा पॉवर बैकअप के लिए जेनरेटर की व्यवस्था होगी. गर्मी के दिनों में यात्रा का आनंद लेने में परेशानी ना हो इसके लिए हर बोट को एसी युक्त बनाया जा रहा है.
इतना ही नहीं, पर्यटकों को किसी तरह की दिक्कत ना हो इसका भी ध्यान रखा जा रहा है. यही वजह है कि बोट को ऑटोमेटिक बोट लोकेशन सिस्टम से लैस किया गया है, जिससे इसकी निगरानी की जा सके. पर्यटकों की सुरक्षा के लिए बोट पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं. वहीं बोट को इस तरीके से तैयार किया जा रहा है, अगर बोट हाई स्पीड में भी चले तो कम लहरें पैदा हों.
एक बोट की कितनी होगी कीमत?पटना वाटर मेट्रो के लिए जिस बोट का इस्तेमाल किया जायेगा उसका नाम ‘एमवी-गोमधर कुंवर’ है. इस बोट की कीमत करीब 12 करोड़ रुपए से अधिक बताई जा रही है. पूरे पटना वाटर मेट्रो प्रोजेक्ट की लागत करीब 908 करोड़ रुपए मानी जा रही है. यह प्रोजेक्ट इनलैंड वाटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया और बिहार सरकार का एक संयुक्त प्रयास है. इसमें कोचि जहाज निर्माण स्थल के इंजीनियरों से तकनीकी मदद भी ली जा रही है.
कितना लंबा होगा वाटर मेट्रो का पहला मार्ग?पटना वाटर मेट्रो का पहला रूट दीघा और कंगन घाट के बीच होगा, जिसकी लंबाई करीब 10 किमी होगी. वाटर मेट्रो का सफर कंगन घाट से शुरू होकर गायघाट होते हुए गांधी घाट, दीघा घाट, फरक्का महतो घाट, नारियल घाट, पानापुर, कोंहरा घाट, काली घाट (सोनपुर) और छेछर घाट पर समाप्त होगा. जानकारी के अनुसार, भविष्य में योजनाओं को 10 टर्मिनल के साथ 4 रूट तक विस्तार किया जाएगा.