Mangal Dev Ki Katha: किसके पुत्र हैं मंगल देव? रोचक है उनके जन्म की कथा
TV9 Bharatvarsh March 10, 2026 11:43 AM

Mangal Dev Ki Katha: ज्योतिष शास्त्र में मंगल देव को एक महत्वपूर्ण ग्रह के रूप में देखा जाता है. मंगल देव ऊर्जा, साहस, पराक्रम, भूमि, और छोटे भाई-बहनों का कारक माने जाते हैं. मंगल का गोचर सभी राशियों के जातकों को प्रभावित करता है. यही नहीं मंगल की कुंडली मेंं स्थिति व्यक्ति के जीवन को गहरे रूप से प्रभावित करती है. मंगल को युद्ध का देवता माना जाता है.

हालांकि, इस विषय में कम ही लोग जानते हैं कि मंगल देव किसके पुत्र हैं और उनका जन्म कैसे हुआ? ऐसे में चलिए इससे जुड़ी पौराणिक कथा विस्तार से जानते हैं.

पौराणिक कथा के अनुसार…

मंगल के जन्म की कथा काफी रोचक है. मंगल भगवान शिव और धरती के पुत्र हैं. पौराणिक कथा के अनुसार, अंधकासुर नाम के एक असुर ने भगवान शिव की कड़ी तपस्या की. अंधकासुर की तपस्या से भगवान भोलेनाथ बहुत प्रसन्न हुए. जब उन्होंने उससे वर मांगने के लिए कहा तो अंधकासुर ने ये वर मांगा कि जहां भी उसके रक्त की बूंदें गिरे, वहां उसी के जैसे सैकड़ों दैत्य उत्पन्न हो जाएं.

भगवान शिव ने अंधकासुर को उसका मांगा हुआ वरदान दे दिया. वरदान के मिलते ही अंधकासुर ने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया. इसके बाद पीड़ित लोग परेशान होकर भगवान शिव की शरण में पहुंचे. तब भगवान शिव ने अंधकासुर से भीषण युद्ध किया. अंधकासुर से युद्ध करते-करते समय शिव जी के माथे से कुछ पसीने की बूंदें धरती पर गिर गईं, जहां ऐसा हुआ, वहां धरती दो फाट हो गई. इसी से मंगल देव की उत्पत्ति हुई.

रक्त की बूंदों को मंगल ने अपने भीतर किया समाहित

जब भगवान शिव ने अंधकासुर का अंत किया तो उसी समय असुर के रक्त की बूंदों को मंगल देव ने अपने भीतर समाहित कर लिया. ताकि उसका रक्त धरती पर न गिरे और कोई दूसरा असुर जन्म न ले सके. चूंकि मंगल ने रक्त को अपने अंदर समाहित किया, इसलिए वो धरती पुत्र माने जाते हैं. पृथ्वी से उत्पन्न होने के कारण मंगल देव को भौम भी कहा जाता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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