Bubble Wrap: बनाना था 'वॉलपेपर', बन गया 'सुकून'…जब दो इंजीनियरों की गलती ने रचा इतिहास!
TV9 Bharatvarsh March 11, 2026 08:43 PM

हम अक्सर कहते हैं कि भैया गलतियां बहुत महंगी पड़ती हैं…लेकिन 1957 में दो इंजीनियरों से हुई एक गलती ने दुनिया को सबसे काम की या यूं कहें कि सबसे सुकून पहुंचाने वाली चीज दे दी. यहां बात हो रही है Bubble Wrap की, जिसे आज हम कीमती सामानों की सेफ्टी के लिए इस्तेमाल करते हैं. दरअसल, इसे दीवारों को सजाने के लिए ईजाद किया गया था, पर…खैर. आइए जानते हैं इस ‘दिलचस्प’ गलती के पीछे की कहानी.

ये कहानी शुरू होती है अमेरिका के न्यू जर्सी के एक गैरेज से, जहां अल्फ्रेड फील्डिंग और मार्क चावानेस कुछ क्रांतिकारी टाइप इनोवेशन करने की कोशिश कर रहे थे. उनका इरादा एक ऐसा थ्री डी वॉलपेपर बनाने का था, जो छूने में मखमली सा अहसास दे, और दिखने में बीट जनरेशन के हिसाब से कूल लगे.

उन्होंने प्लास्टिक के दो पर्दों को एक मशीन के जरिए आपस में चिपकाने की कोशिश की. लेकिन मशीन की सेटिंग ऐसी बिगड़ी कि उनके बीच हवा के छोटे-छोटे बुलबुले बन गए. अल्फ्रेड और मार्क का वॉलपेपर बनाने का यह आइडिया बुरी तरह फेल हो गया, क्योंकि कोई भी अपनी दीवार पर प्लास्टिक के बुलबुले नहीं चिपकाना चाहता था. लेकिन यहीं से बबल रैप का जन्म भी हुआ. ये भी पढ़ें: सिर्फ 1 दिन की ‘जिंदगी’…मिलिए 5 ऐसे जीव से जिनके पास ‘कल’ नहीं होता!

ग्रीनहाउस से IBM के कंप्यूटर तक का सफर

बतौर वॉलपेपर रिजेक्ट होने के बाद मार्क और अल्फ्रेड ने इसे ग्रीनहाउस इंसुलेशन के रूप में बेचने की कोशिश की, और किस्मत देखिए वहां इन्हें कामयाबी ही हाथ लगी. ये भी पढ़ें: आंखों में आंसू, हाथ में निवाला Swiggy Delivery Boy की इस दास्तां ने सबको रुला दिया!

लेकिन कहानी ने तब मजेदार मोड़ लिया, जब 1960 में आईबीएम ने अपना कीमती और बेहद नाजुक 1401 कंप्यूटर लॉन्च किया. ऐसे में उन्हें उसे सुरक्षित शिप करने के लिए किसी हल्के और शॉक प्रूफ मैटेरियल की जरूरत थी. यहीं से बबल रैप का पैकेजिंग में इस्तेमाल हुआ, और इसने इतिहास रच दिया. आज ये सिर्फ पैकेजिंग ही नहीं, बल्कि स्ट्रेस बस्टर भी बन चुका है. कई लोगों के लिए इसके बुलबुले को फोड़ना थेरेपी जैसा काम करती है.

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